शिल्प-अधिकार एवं नवसृजन 2.0 कार्यशाला का आयोजन

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शिल्प-अधिकार एवं नवसृजन 2.0 कार्यशाला का आयोजन


जोधपुर, 22 सितम्बर (हि.स.)। आईआईटी जोधपुर के जोधपुर सिटी नॉलेज एंड इनोवेशन फाउंडेशन की ओर से जोधपुर सिटी नॉलेज एंड इनोवेशन क्लस्टर के तहत शिल्प-अधिकार एवं नवसृजन 2.0 कार्यशाला आयोजित की गई। एक दिवसीय कार्यशाला में करीब 100 शिल्पकारों, शिक्षकों और डिजाइन विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसमें पारंपरिक शिल्प के संरक्षण के साथ डिजाइन नवाचार, उत्पाद विकास, ब्रांडिंग, बौद्धिक संपदा अधिकार और आधुनिक बाजारों से जुडऩे के अवसरों पर मंथन किया गया।

कार्यशाला के दो प्रमुख भाग रहे। शिल्प-अधिकार के तहत बौद्धिक संपदा अधिकार और डिजाइन पंजीकरण पर जोर दिया गया, जबकि नवसृजन 2.0 के माध्यम से पारंपरिक शिल्प में समकालीन डिजाइन के नए दृष्टिकोण विकसित करने पर चर्चा हुई। शिल्पकारों द्वारा तैयार उत्पादों के डिजाइनों को पंजीकरण की दिशा में आगे बढ़ाने की पहल भी की गई। इससे उनके रचनात्मक कार्यों को पहचान और कानूनी संरक्षण मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।

कार्यक्रम का आयोजन बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स, जेसीकेआईएफ के अध्यक्ष एवं आईआईटी जोधपुर के निदेशक प्रो. अविनाश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में किया गया। उद्घाटन सत्र में डॉ. आकांक्षा चौधरी ने शिल्पकार समुदायों को ज्ञान, नवाचार और बदलते बाजारों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। प्रो. प्रकाश तिवारी ने पारंपरिक ज्ञान, नवाचार और आधुनिक अवसरों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। वहीं प्रो. सुनील कुमार खिजवानिया ने पारंपरिक शिल्प के लिए टिकाऊ अवसर तैयार करने में अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और नवाचार की भूमिका रेखांकित की।

डिजाइन, ब्रांडिंग और बाजार पर विशेषज्ञ सत्र

कार्यशाला में आईआईटी जोधपुर और एनआईएफटी जोधपुर के विशेषज्ञों ने बौद्धिक संपदा अधिकार एवं डिजाइन संरक्षण, पारंपरिक शिल्प में डिजाइन नवाचार, ब्रांडिंग, कहानी कहने की कला, उत्पाद मूल्यवर्धन, बाजार से जुड़ाव, शिल्प उन्नयन और संरक्षण जैसे विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए। सत्रों में समकालीन डिजाइन, उत्पाद प्रस्तुति, ब्रांड पहचान, बाजार तक पहुंच और टिकाऊ आजीविका से जुड़े पहलुओं पर चर्चा हुई।

कार्यशाला के दौरान शिल्पकारों को विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद और विचारों के आदान-प्रदान का अवसर मिला। साथ ही पारंपरिक शिल्प की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए उसे वर्तमान उपभोक्ताओं की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के तरीकों पर भी विचार किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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