गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का कानून बने तो तुरंत बंद हो गौ हत्या : बाबा उमाकांत

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गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का कानून बने तो तुरंत बंद हो गौ हत्या : बाबा उमाकांत


जयपुर, 28 अगस्त (हि.स.)। रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर आयोजित सत्संग में परम संत बाबा उमाकान्त महाराज ने देश में गौ हत्या बंद कराने की अपील करते हुए कहा कि इसके लिए गौशाला संचालक, साधु-संत, मठाधीश, आश्रमों के महंत, योगी, धार्मिक विद्वान और विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु एकजुट हों। उन्होंने कहा कि जो राजनेता गौ हत्या बंद कराने के पक्ष में हैं, वे भी आपस में विचार-विमर्श कर इस दिशा में प्रयास करें।

उन्होंने कहा कि यदि सर्वसम्मति से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का एक लाइन का कानून बना दिया जाए तो गौ हत्या तुरंत बंद हो सकती है। उन्होंने गौ हत्या के खिलाफ आंदोलन कर रहे लोगों से कलेक्टर-एसपी को ज्ञापन देने या अलग-अलग आंदोलन करने के बजाय एकजुट होकर केंद्र सरकार के सक्षम स्तर तक अपनी बात पहुंचाने की अपील की।

बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि इस अभियान में डंडे, तोड़फोड़, हड़ताल, लाठीचार्ज या हिंसा का सहारा नहीं लिया जाना चाहिए। शांतिपूर्ण ढंग से प्रयास करने वालों को उन्होंने अपने और अपने अनुयायियों के समर्थन का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि वे तरीका बता सकते हैं, लेकिन आगे की जिम्मेदारी आंदोलन से जुड़े लोगों को स्वयं निभानी होगी।

उन्होंने कहा कि जब देश में गौ हत्या बंद होगी और गाय, बैल तथा सूअर का वध नहीं होगा, तब सतयुग की किरण दिखाई देने लगेगी। उनके अनुसार कलयुग के बीच ही सतयुग आएगा, लेकिन जल्दबाजी में बदलाव लाने से जन-धन की हानि हो सकती है। उन्होंने कहा कि समय के साथ ऐसा दौर आएगा, जब शराब और मांसाहार से लोग दूर होंगे, अत्याचार समाप्त होंगे और सदाचार का विधान स्थापित होगा। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भविष्य में मांस, अंडे और मछली की दुकानें बंद होने जैसी स्थिति आएगी तथा अत्याचारी लोग या तो सुधरेंगे या समाप्त हो जाएंगे। इसी परिवर्तन को उन्होंने ‘सतयुग’ के आगमन से जोड़ा।

बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि गौ हत्या बंद कराने की इच्छा रखने वाले सभी लोगों को आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आना चाहिए और शांतिपूर्ण तरीके से उन लोगों से संपर्क करना चाहिए जिनके पास निर्णय लेने की शक्ति है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति सहित सक्षम स्तर पर यदि सामूहिक रूप से मांग रखी जाए तो इस दिशा में कानून बनाया जा सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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