जमानत से जुडे मामले में अत्यधिक गहराई में जाने से बचे हाईकोर्ट
जयपुर, 06 अगस्त (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने निजी खातेदारी की आवासीय योजना नृसिंह ओरकेड को लेकर शहर के रामनगरिया पुलिस थाने में दर्ज धोखाधडी के मामले में आरोपी को जमानत दे दी है। वहीं राजस्थान हाईकोर्ट के गत 23 अप्रैल के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें हाईकोर्ट ने प्रार्थी को जमानत देने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रार्थी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है, उस पर लगाए आरोप के अपराध की ट्रायल मजिस्ट्रेट द्वारा होनी है। हमारा मानना है कि हाईकोर्ट ने अपीलार्थी पर लगाए गए आरोपों पर जरूरत से ज्यादा गहराई से विचार किया है, जिससे हाईकोर्ट को बचना चाहिए था। इसलिए अपीलार्थी को जमानत देना उचित होगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश श्यामलाल मीणा की एसएलपी को मंजूर करते हुए दिए।
अपीलार्थी के अधिवक्ता दीपक चौहान ने बताया कि आरोपी के पिता एवं दादी की कथित जिम्मेदारी उस पर नहीं डाली जा सकती। यदि किसी ने खरीदारों के साथ धोखा किया है तो वह हाउसिंग सोसायटी है, न कि खातेदार। मौजूदा मामले में जांच पूरी होकर चालान पेश हो चुका है, लेकिन आरोप तय नहीं हुए हैं। अपीलार्थी 4 नवंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में है, उसे जमानत पर रिहा किया जाए। वहीं राज्य सरकार व शिकायतकर्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेज तैयार किए हैं। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने आरोपी को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। मामले में अनुसार श्याम लाल मीणा के खिलाफ रामनगरिया पुलिस थाने में साल 2022 में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, जालसाजी और अन्य धाराओं के तहत दो एफआईआर दर्ज हुई थी। उस पर आरोप है कि उसके पिता एवं दादी सहित अन्य खातेदारों ने पावर ऑफ अटॉर्नी धारक के जरिए भूमि एक हाउसिंग सोसायटी को बेची थी। हाउसिंग सोसायटी ने बाद में जमीन कई खरीदारों को बेच दी। खरीदारों का आरोप था कि जमीन की कीमत भुगतान करने पर भी उन्हें भूखंडों का कब्जा नहीं मिला है और आरोपी ने धोखाधडी के लिए जाली दस्तावेज बनाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक

