निकाय और पंचायत चुनाव जानबूझकर टाल रही है सरकार : डोटासरा

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निकाय और पंचायत चुनाव जानबूझकर टाल रही है सरकार : डोटासरा


जयपुर, 10 जुलाई (हि.स.)। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार पर पंचायत राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनाव जानबूझकर टालने का आरोप लगाया है। शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि सरकार ने ओबीसी आयोग का गठन समय पर नहीं किया और आयोग को अब तक आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध नहीं कराए हैं। इसके कारण स्थानीय निकायों के चुनाव अनावश्यक रूप से लंबित हैं।

डोटासरा ने कहा कि सरकार बनने के करीब दस माह बाद, जब ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और कुछ नगर निकायों का कार्यकाल समाप्त हो चुका था तथा चुनाव लंबित थे, तब ओबीसी आयोग का गठन किया गया। आयोग को तीन माह में वार्डवार सर्वे के आधार पर ओबीसी आरक्षण संबंधी रिपोर्ट देनी थी, लेकिन 14-15 माह बीत जाने के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि चार माह में पूरा होने वाला परिसीमन का कार्य भी करीब 13 माह तक खींचा गया, जिससे सरकार की मंशा चुनाव टालने की प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि संविधान के 73वें और 74वें संशोधन तथा अनुच्छेद 243ई और 243यू के तहत पंचायत राज संस्थाओं और नगर निकायों का कार्यकाल पूरा होने पर समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है। उनका दावा था कि उच्च न्यायालय भी चुनाव कराने के निर्देश दे चुका है, लेकिन राज्य सरकार अब तक चुनाव की घोषणा नहीं कर रही है।

डोटासरा ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग लगातार सरकार को चुनाव कराने के लिए पत्र लिख रहा है, लेकिन सरकार न तो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से संबंधित आवश्यक आंकड़े उपलब्ध करा रही है और न ही आयोग के पत्रों का जवाब दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने ओबीसी आयोग को कार्यालय, कंप्यूटर और पर्याप्त कर्मचारी तक उपलब्ध नहीं कराए। उन्होंने कहा कि आयोग को संसाधन नहीं देना भी चुनाव टालने की रणनीति का हिस्सा है।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने ओबीसी आयोग के 'राजधारा ऐप' की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐप में 'गवर्नमेंट' और 'सिटीजन' दो विकल्प दिए गए हैं, लेकिन 'गवर्नमेंट' विकल्प को लॉक कर केवल 'सिटीजन' विकल्प सक्रिय रखा गया है। उनका कहना था कि सरकारी प्रगणकों और बीएलओ के माध्यम से डेटा संग्रह अधिक प्रमाणिक होता, जबकि वर्तमान व्यवस्था में कोई भी व्यक्ति ओटीपी के माध्यम से स्वयं जानकारी दर्ज कर सकता है। इससे आंकड़ों की प्रमाणिकता और उनकी कानूनी वैधता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।

डोटासरा ने मांग की कि सरकार ओबीसी वर्ग का सर्वे सरकारी तंत्र के माध्यम से कराए, प्रमाणिक आंकड़ों के आधार पर आरक्षण तय करे और नगर निकाय तथा पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव शीघ्र घोषित करे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ओबीसी वर्ग के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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