पर्यावरण स्वीकृतियां जारी कराने में फेसिलिलेटर की भूमिका निभाए संबंधित विभाग-सीएस

पर्यावरण स्वीकृतियां जारी कराने में फेसिलिलेटर की भूमिका निभाए संबंधित विभाग-सीएस
पर्यावरण स्वीकृतियां जारी कराने में फेसिलिलेटर की भूमिका निभाए संबंधित विभाग-सीएस


जयपुर, 14 मई (हि.स.)। मुख्य सचिव सुधांश पंत ने कहा है कि जिला स्तरीय समिति से पर्यावरण स्वीकृतियां प्राप्त खानधारकों को राज्य स्तरीय समिति सीया से पर्यावरण स्वीकृतियां जारी कराने में संबंधित विभागों को फेसिलिलेटर की भूमिका निभानी होगी। उन्होंने माइंस, पर्यावरण, राज्य स्तरीय एंवायरमेंट इंपेक्ट एसेसमेंट अथॉरिटी, डिया से पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त खान व क्वारी लाइसेंस धारकों से परस्पर सहयोग व समन्वय से तय समय सीमा में पर्यावरण स्वीकृतियां जारी कराने की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने को कहा है।

मुख्य सचिव सुधांश पंत मंगलवार को सचिवालय में माइंस, पर्यावरण, सीया और सेक के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि जिला स्तरीय समिति से पर्यावरण स्वीकृतियां प्राप्त करीब 24 हजार 5 हैक्टेयर तक की लीज व क्वारी लाइसेंस वाली खानों के आवश्यक दस्तावेज परिवेश पोर्टल पर अपलोड़ कर दिए गए है। सीया द्वारा करीब 12 हजार आवेदनों की स्क्रूटनिंग का काम भी कर लिया गया है। अब शेष रहे आवेदनों की स्क्रूटनिंग के काम में तेजी लाने के साथ ही स्क्रूटनिंग हो चुके आवेदनों के खान धारकों द्वारा फार्म दो का परिवेश पोर्टल पर अपलोड किया जाना है। स्क्रूटनिंग वाली खानों के खानधारक स्वयं या माइंस विभाग के अधिकारियों से समन्वय बनाते हुए अविलंब फार्म 2 अपलोड़ करें ताकि राज्य स्तरीय अथॉरिटी द्वारा पर्यावरण स्वीकृतियां जारी हो सके। उन्होंने छोटी मोटी कमियों को पूरा कराने के लिए अनावश्यक पत्राचार के स्थान पर औपचारिकताओं को सीधे संबंधित से पूरी कराने की आवश्यकता प्रतिपादित की।

मुख्य सचिव पंत ने बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा डिस्ट्रक्ट लेवल एन्वायरमेंट इंपेक्ट एसेसमेंट अथॉरिटी द्वारा जारी पर्यावरण स्वीकृति वाले खानधारकों को राज्य स्तरीय एन्वायरमेंट इंपेक्ट एसेसमेंट अथॉरिटी से एक साल में पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त करने के निर्देश दिये गये थे। एनजीटी के आदेशों के अनुसार जिला स्तर से पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त इन खान धारकों को राज्य स्तरीय समिति से पर्यावरण स्वीकृति लिया जाना जरुरी है। उन्होंने माइंस विभाग द्वारा करीब 24 हजार खानोें के दस्तावेज परिवेश पोर्टल पर अपलोड कर पूरी करने की सराहना की। उन्होंने कहा कि माइंस प्रदेश की महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि से जुड़ा विभाग है और इससें लाखों लोग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रुप से रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में माइनिंग गतिविधियां निर्बाध जारी रखने के लिए समय पर औपचारिकताएं पूरी कराकर राज्य स्तरीय पर्यावरण स्वीकृतियां जारी कराना जरुरी है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव वन व पर्यावरण अपर्णा अरोड़ा ने बताया कि माइंस व पर्यावरण विभाग द्वारा परस्पर सहयोग से प्राथमिकता से स्क्रूटनिंग कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सीया द्वारा 12 हजार आवेदनोें को वेलिडेटेड कर लिया गया है और संबंधित खान धारकों को परिवेश पोर्टल पर फार्म 2 अपलोड करने को कहा गया है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि विभाग द्वारा सहयोगी की भूमिका निभाते हुए वेलिडेशन का कार्य किया जा रहा है।

माइंस सचिव आनन्दी ने बताया कि विभाग द्वारा जिला स्तरीय समिति से पर्यावरण स्वीकृत प्राप्त लगभग सभी को राज्य स्तरीय प्राधिकरण को ऑनलाईन परिवेश पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। विभाग द्वारा सीया से कोआर्डिनेशन के लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों को समन्वय अधिकारी बनाते हुए कोआर्डिनेशन की जिम्मेदारी दी गई है।

आनन्दी ने बताया कि विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे वेलिडिटेड आवेदनों के खानधारकों से समन्वय बनाते हुए उन्हें परिवेश पोर्टल पर तत्काल फार्म 2 भर कर अपलोड करावें ताकि तय समय सीमा में पर्यावरण स्वीकृतियां जारी कराई जा सके। विभाग इसे मिशन मोड पर ले रहा है ताकि जिला स्तरीय समिति से स्वीकृतियां प्राप्त खानों को राज्य स्तर से पर्यावरण स्वीकृतियां जारी कराकर इन खानों में खनन गतिविधियां बिना किसी अवरोध के जारी रखी जा सकें।

हिन्दुस्थान समाचार/संदीप/ईश्वर

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