‘मा’ योजना से प्रदेश में अंग प्रत्यारोपण को मिली नई दिशा

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‘मा’ योजना से प्रदेश में अंग प्रत्यारोपण को मिली नई दिशा


जयपुर, 28 अक्टूबर (हि.स.)। किसी परिवार के लिए इससे बड़ी पीड़ा क्या होगी कि अपनों की जिंदगी बचाने के लिए चिकित्सक अंग प्रत्यारोपण की सलाह दें, लेकिन महंगे इलाज का खर्च उसकी आर्थिक हैसियत से बाहर हो। एक ओर अपनों को बचाने की जंग और दूसरी ओर पैसों की मजबूरी। ऐसे कठिन समय में सरकार की स्वास्थ्य सुरक्षा योजना किसी परिवार के लिए उम्मीद की किरण बन जाए, यही जनकल्याण, सुशासन और संवेदनशीलता की सबसे बड़ी मिसाल है।

राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर शुरू की गई मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य (मा) योजना अंग प्रत्यारोपण जैसी स्थिति का सामना कर रहे जरूरतमंद मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। इससे न केवल गरीब और असहाय रोगियों का जीवन बचाया जाना संभव हुआ है, बल्कि प्रदेश में अंगदान और अंग प्रत्यारोपण की मानवीय पहल में भी अभूतपूर्व प्रगति दर्ज हुई है।

अंग प्रत्यारोपण जैसी जटिल और महंगी चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए योजना के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई सहायता के आंकड़े बताते हैं कि जरूरतमंद मरीजों तक स्वास्थ्य सुरक्षा पहुंचाने के प्रयासों को प्रदेश में नई गति मिली है। वर्तमान सरकार के 34 माह में प्रदेश में करीब 2 हजार ट्रांसप्लांट इस योजना के तहत किए गए हैं। साथ ही, 671 व्यक्तियों के कॉक्लियर इम्प्लांट किया गया है।

किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज और उनके परिवार लंबे समय तक उपचार की चुनौती का सामना करते हैं।

‘मा’ योजना में ऐसे लोगों का किडनी प्रत्यारोपण पूरी तरह कैशलेस किया जा रहा है। वर्तमान राज्य सरकार के कार्यकाल में ‘मा’ योजना के तहत अब तक 1,310 मरीजों को कैशलेस किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा मिली, जबकि पूर्ववर्ती सरकार के पूरे कार्यकाल में यह संख्या 748 थी। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 58 करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई।

बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसे जटिल उपचार के लिए भी योजना के अंतर्गत उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। पिछली सरकार के समय संचालित योजना में केवल 88 लाभार्थियों को यह सुविधा मिली थी, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 563 लाभार्थियों को सहायता उपलब्ध कराई गई। इस पर व्यय राशि पूर्ववर्ती सरकार में 5.74 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर 35 करोड़ रुपये हो गई।

इसी प्रकार लीवर ट्रांसप्लांट के लिए वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 112 मरीजों को सहायता मिली, जबकि विगत सरकार के कार्यकाल में यह संख्या 60 थी। इसी प्रकार 9 रोगियों में हृदय प्रत्यारोपण किया गया। वहीं वर्तमान सरकार के 34 माह में ही 671 लाभार्थियों का कॉक्लियर इम्प्लांट किया गया, जबकि पूर्ववर्ती सरकार के 5 साल में यह संख्या 366 रही।

मुख्यमंत्री की पहल पर ‘मा’ योजना में पहली बार इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी की सुविधा शुरू की गई। इससे प्रदेश के नागरिकों को दूसरे राज्यों में भी अंग प्रत्यारोपण की सुविधा मिल सकी। अन्य राज्यों में अंग प्रत्यारोपण के 106 मामलों में करीब 6 करोड़ रूपए की सहायता उपलब्ध करवाई गई। इनमें 79 किडनी ट्रांसप्लांट, 12 लिवर ट्रांसप्लांट, 8 बोन मैरो ट्रांसप्लांट, 4 लंग ट्रांसप्लांट और 3 हार्ट ट्रांसप्लांट के मामले शामिल हैं।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के दृष्टिकोण के साथ अधिक से अधिक लोगों को इस योजना से जोड़ने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों की अनुपालना में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने इस योजना का दायरा लगातार बढ़ाया। पूर्ववर्ती सरकार के मुकाबले उपचार के पैकेज की संख्या 1800 से बढ़ाकर करीब 2200 की गई। इससे सामान्य बीमारियों से लेकर रोबोटिक सर्जरी तक और नवजात से लेकर बुजुर्गों तक को इस योजना का अधिकतम लाभ मिलना सुनिश्चित हुआ। इसी का परिणाम है कि विगत 34 माह के समय में करीब 50 लाख लोगों को इस योजना में निःशुल्क उपचार मिला है। इस पर राज्य सरकार ने करीब 10 हजार 678 करोड़ रूपए का व्यय किया है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का कहना है कि राज्य सरकार का प्रयास है कि आर्थिक विवशता किसी जरूरतमंद मरीज के उपचार में बाधा न बने। जब किसी परिवार के सामने अपनों की जिंदगी बचाने का सवाल हो, तब सरकारी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना उनके लिए उम्मीद और भरोसे का माध्यम बनती है। यही संवेदनशीलता और जनकल्याण की भावना राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के प्रयासों का महत्वपूर्ण आधार है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संदीप

Livevns.news Desk
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