मुख्यमंत्री का विपक्ष पर हमला, गहलोत ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
जयपुर, 18 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026 के पारित न होने की गूंज अब राजस्थान की राजनीति में तेज सुनाई देने लगी है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर संसद में हुए टकराव के बाद भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं और प्रदेश में इसे लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट लिखकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि संसद में जो हुआ, वह लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। उन्होंने कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके पर निशाना साधते हुए इसे “नारी शक्ति के अधिकारों पर प्रहार” बताया और कहा कि देश की महिलाएं आने वाले चुनावों में इसका जवाब देंगी।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को पहले से पता था कि विपक्ष के सहयोग के बिना बिल पास नहीं होगा, फिर भी सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाई गई। गहलोत ने कहा कि यह विधेयक परिसीमन के मुद्दे से जुड़ा था, जिससे विपक्ष को निशाना बनाने की आशंका थी।
वरिष्ठ भाजपा नेता वसुंधरा राजे ने भी विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि यह करोड़ों महिलाओं के सपनों पर आघात है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में भागीदार बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम था, जिसे विपक्ष ने रोकने का प्रयास किया।
इसी क्रम में उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने भी विपक्ष की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के इस ऐतिहासिक अवसर को विपक्ष ने राजनीतिक कारणों से खो दिया और देश की महिलाएं इसे कभी नहीं भूलेंगी।
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने विधेयक में कई खामियां बताते हुए इसे पर्याप्त रूप से पारदर्शी नहीं बताया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

