राजस्थान शक्ति,भक्ति व स्वाभिमानियों की धरती, इसका मान बना रहे— भजनलाल शर्मा

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राजस्थान शक्ति,भक्ति व स्वाभिमानियों की धरती, इसका मान बना रहे— भजनलाल शर्मा


राजस्थान शक्ति,भक्ति व स्वाभिमानियों की धरती, इसका मान बना रहे— भजनलाल शर्मा


राजस्थान शक्ति,भक्ति व स्वाभिमानियों की धरती, इसका मान बना रहे— भजनलाल शर्मा


राजस्थान शक्ति,भक्ति व स्वाभिमानियों की धरती, इसका मान बना रहे— भजनलाल शर्मा


राजस्थान शक्ति,भक्ति व स्वाभिमानियों की धरती, इसका मान बना रहे— भजनलाल शर्मा


राजस्थान शक्ति,भक्ति व स्वाभिमानियों की धरती, इसका मान बना रहे— भजनलाल शर्मा


अजमेर, 24 फरवरी(हि.स.)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजनीति में भी धर्म होना चाहिए। राजस्थान की सरकार बिना किसी भेदभाव के सबका साथ, सबका विकास के उद्देश्य से जन मानस को केंद्र में रखकर काम कर रही है। राजस्थान शक्ति,भक्ति व स्वाभिमानियों की धरती है, इसका मान बना रहना चाहिए।

मुख्यमंत्री मंगलवार को राजस्थान के अजमेर स्थित तीर्थराज पुष्कर में आयोजित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा मंच से विशाल जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री अजमेर में 28 फरवरी को प्रस्तावित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जनसभा की तैयारियों के सिलसिले में आए हुए थे। उन्होंने अजमेर के कायड़ विश्राम स्थली में तैयार किए जा रहे जनसभा पंडाल और व्यवस्थाओं का जायजा लिया व अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इसके बाद वे सीधे तीर्थराज पुष्कर पहुंचे जहां बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री को माल्यार्पण और वस्त्र ओढ़ा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पंडित धीरेन्द्र शास्त्री को स्मृति चिन्ह के रूप में हल भेंट किया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत भी थे। मुख्यमंत्री ने उपस्थित हजारों के जनसमूह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 28 तारीख को प्रस्तावित जनसभा में उपस्थित होने के लिए आग्रह पूर्वक निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि 28 तारीख को देश के ही नहीं दुनिया के सबसे बड़े नेता अजमेर पधार रहे हैं। आप सभी पधारे और यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सुनें। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी जैसे युग पुरुष सदियों में मिलते हैं जिन्होंने भारत का नाम विश्व में गौरव किया है। सनातन संस्कृति को गौरव किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की सरकार निरंतर अपनी संस्कृति और संस्कार के युगोयुगों तक कायम बनाए रखने के विचार के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हम राजस्थान की संस्कृति जो शक्ति और भक्ति की धरती है। स्वाभिमान की धरती है। इसका मान बना रहे। इस लक्ष्य से काम कर रहे हैं। राजनीति होती है, किन्तु उसमें भी धर्म होना चाहिए। कोई भी काम जन के मानस का हो वह होना चाहिए। हम सभी को साथ लेकर चलते हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान की सरकार ने सौ करोड़ रुपया तीर्थ स्थलों के विकास के लिए बजट प्रावधान रखा है। उन्होंने कहा कि पुष्कर जगतपिता ब्रह्मा जी का स्थान है। ब्रह्मा जी ने अपनी दोनों भुजाओं से दोनों महा सागरों को जोड़ा हुआ है। यहां का पानी आधा हिन्द महासागर की तरफ जाता है तो आधा अरब सागर की तरफ जाता है। पुष्कर सीधे हिन्द महासागर व अरब सागर को जोड़ता है। उन्होंने बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री जी का धन्यवाद किया कि उनका तो दिन सफल हो गया। वे आए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसभा कार्यक्रम की तैयारियों को देखने थे किन्तु पूरे देश में सनातन संस्कृति का परचम फहराने वाले बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री जी के दर्शन भी हो गए, इससे भी बड़ी बात यह हुई इस मंच से जनता जनार्दन का आशीर्वाद उन्हें मिल गया। उन्होंने कहा कि हम राजनीति करने वालों के लिए जनता जनार्दन का आशीर्वाद बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि धीरेन्द्र शास्त्री जी जहां भी जाते हैं वहां महाराज जी उस क्षेत्र को राम मय, हनुमान मय बना देते हैं।

इससे पूर्व धीरेन्द्र शास्त्री ने हनुमंत कथा के दूसरे दिन श्रेष्ठ भक्ति के तहत प्रेम लक्षणा भक्ति पर कथा की। उन्होंने चार तरह की भक्ति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा इनमें चौथी भक्ति प्रभाव, स्वभाव और भाव की भक्ति होती है। किसी को अपना बनाना है तो प्रभाव व स्वभाव में से किसी एक को अपना बनाना होता है। किन्तु भगवान को ना प्रभाव से अपना बना सकते है ना स्वभाव से। उसे तो भाव से अपना बना सकते है। भगवान तो भक्त का भाव देखता है। उन्होंने कहा कि प्रभाव से अपना बनाने वाले पद पर रहते तक ही अपने रहते हैं, स्वभाव से अपना बनाने वाले आजीवन भक्त बने रहते हैं। भगवान को तो भाव से भजना होता है जो जीवन में और जीवन के बाद भी भक्त का बेड़ा पार लगाते हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को बाहर से जगत का होना चाहिए किंतु अंदर से भगवान का हो जाना चाहिए। महाराज धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भगवान से मांगों मत बल्कि भगवान को ही मांग लो यही प्रेम लक्षणा भक्ति है। धीरेन्द्र शास्त्री जी का 25 फरवरी को पुष्कर में कथा का तीसरा व अंतिम दिवस है। वे 2 से 4 बजे तक कथा करेंगे। इसके बाद पुष्कर से प्रस्थान करेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

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