चाक पर आकार ले रहे मिट्टी के करवे: मांडणे और गोटा-पत्ती से निखर रही सजावट

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चाक पर आकार ले रहे मिट्टी के करवे: मांडणे और गोटा-पत्ती से निखर रही सजावट


चाक पर आकार ले रहे मिट्टी के करवे: मांडणे और गोटा-पत्ती से निखर रही सजावट


चाक पर आकार ले रहे मिट्टी के करवे: मांडणे और गोटा-पत्ती से निखर रही सजावट


जयपुर, 27 अक्टूबर (हि.स.)। करवा चौथ का पर्व 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। पर्व को लेकर राजधानी में बाजारों से लेकर कुम्हारों के घरों तक तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के कुम्हाराें के चाक पर मिट्टी के करवे आकार ले रहे हैं। इस बार पारंपरिक करवों के साथ रंग-बिरंगे डिजाइनर करवे भी तैयार किए जा रहे हैं। इन पर मांडणा, गोटा-पत्ती और स्टोन वर्क से सजावट की जा रही है। पर्व नजदीक आने के साथ ही महिलाओं में पूजन सामग्री की खरीदारी को लेकर उत्साह बढ़ने लगा है।

अजमेर रोड स्थित गजसिंहपुरा में कुम्हार कानाराम प्रजापति चाक पर चिकनी मिट्टी को आकार देकर करवे तैयार कर रहे हैं। मिट्टी को गूंथने से लेकर चाक पर आकार देने और सुखाने तक की प्रक्रिया में मेहनत और हुनर की जरूरत होती है। तैयार करवों को आकर्षक बनाने के लिए उन पर रंगों के साथ पारंपरिक मांडणा शैली की आकृतियां उकेरी जा रही हैं। वहीं, गोटा-पत्ती और स्टोन वर्क से सजाए गए डिजाइनर करवे भी तैयार किए जा रहे हैं। इससे महिलाओं को पूजा के लिए पारंपरिक और सजावटी, दोनों तरह के विकल्प मिल रहे हैं।

करवा चौथ पर मिट्टी के करवों का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। सुहागिन महिलाएं इस पर्व पर पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के साथ पूजा-अर्चना करती हैं। पूजन में उपयोग होने वाले करवों को तैयार करने के लिए कुम्हार कई दिन पहले से जुट जाते हैं। चाक पर मिट्टी को आकार देने के बाद उन्हें सुखाया जाता है और फिर सजावट कर बिक्री के लिए तैयार किया जाता है।

करवा चौथ जैसे त्योहार पारंपरिक मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कारीगरों के लिए खास अवसर लेकर आते हैं। डिजाइनर करवों की बढ़ती विविधता से पारंपरिक कला को नया रूप मिल रहा है। स्थानीय कारीगरों को उम्मीद है कि पर्व के नजदीक आने के साथ करवों की मांग और खरीदारी में तेजी आएगी।

कानाराम प्रजापति का कहना है कि करवा चौथ को देखते हुए पारंपरिक मिट्टी के करवों के साथ इस बार सजावटी करवे भी तैयार किए जा रहे हैं। मांडणा, गोटा-पत्ती और स्टोन वर्क से इन्हें आकर्षक रूप दिया जा रहा है, ताकि महिलाएं अपनी पसंद के अनुसार पूजन के लिए करवे खरीद सकें। चाक पर करवे बनाने से लेकर उनकी सजावट तक पूरी प्रक्रिया में मेहनत लगती है। त्योहारों के माध्यम से कुम्हारों की पारंपरिक कला और मिट्टी के बर्तन बनाने के हुनर को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

Livevns.news Desk
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