सीआईएसएफ अधिकारी का बर्खास्तगी आदेश रद्द

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सीआईएसएफ अधिकारी का बर्खास्तगी आदेश रद्द


जयपुर, 14 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने मृत सीआईएसएफ जवान के परिजनों से जुड़े मामले में जांच के दौरान दर्ज एफआईआर के बाद सीआईएसएफ निरीक्षक को निलंबित कर बाद में बिना जांच बर्खास्त करने को गलत माना है। इसके साथ ही अदालत ने बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया है। जस्टिस गणेश राम मीणा की एकलपीठ ने यह आदेश बलराम सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

याचिका में अधिवक्ता सोगत रॉय ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता साल 2003 में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में निरीक्षक लगा था। उसे मुंबई स्थित सीआईएसएफ यूनिट से एक मृत सीआईएसएफ जवान के परिजनों से जुड़े मामले में जांच के लिए देहरादून भेजा गया। उस दौरान मृत जवान के परिजनों ने याचिकाकर्ता के खिलाफ मारपीट और अपमान करने के आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी। एफआईआर के आधार पर सीआईएसएफ ने उसे निलंबित कर दिया और चार दिन बार ही बिना जांच किए सेवा से बर्खास्त कर दिया। इसके बाद दायर विभागीय अपील को भी खारिज कर दिया गया। इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि सीआईएसएफ नियम, 2001 के तहत बडी सजा देने से पहले नियम 36 के तहत विभागीय जांच जरूरी है। दूसरी और विभाग की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता पर गंभीर आरोप थे और पीड़ित पक्ष की सुरक्षा व बल की सुरक्षा को देखते हुए तुरंत कार्रवाई जरूरी थी। सीआईएसएफ अनुशासित बल है और ऐसी कठोर कार्रवाई से बल की छवि बनी रह सकती है। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक

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