बच्चों ने मिट्टी व बीज से बनाई सीड बाल
अजमेर, 04 जून(हि.स.)।भारत विकास परिषद अजमेर मुख्य शाखा, सैंट्रल एकेडमी स्कूल व ऑप्टिमिस्टिक आउटरीच ट्रस्ट द्वारा सीड बॉल निर्माण कार्यशाला एवं संगोष्ठी का आयोजन सेंट्रल एकेडमी स्कूल, अजमेर में चल रहे समर कैम्प किया गया, विश्व प्रर्यावरण दिवस के एक दिन पूर्व आयोजित हुए इस कार्यक्रम में बच्चों को सीड बाल बनाने की प्रक्रिया बताई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता व स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित कर किया गया ।
इस अवसर पर पर्यावरणविद जे. पी. भाटी ने बच्चों को सीड बॉल बनाने की विधि का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया, उन्होंने बताया कि तालाब की चिकनी मिट्टी में कम्पोस्ट खाद मिलाकर उसे गूँथ लिया जाता है तथा उसमें फलदार एवं छायादार वृक्षों जैसे जामुन, खिरनी, सीताफल आदि के बीज डालकर गेंद के आकार के सीड बॉल तैयार किए जाते हैं, इन्हें छायादार स्थान पर सुखाने के बाद वर्षा ऋतु में पहाड़ी एवं मैदानी क्षेत्रों में बिखेर दिया जाता है, जहाँ अनुकूल परिस्थितियों में ये अंकुरित होकर वृक्षों का रूप लेते हैं। उन्होंने सीड बॉल्स के पर्यावरणीय लाभों की जानकारी देते हुए बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रभावी उपाय बताए।
शाखा अध्यक्ष रमेश चंद जाजू ने कहा कि भारत विकास परिषद् प्लास्टिक मुक्त अभियान तथा सघन वन रोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने युवाओं से इस पुनीत अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।
नितेश चौधरी ने बताया कि इस अवसर पर शाखा द्वारा समर कैम्प में भाग लेने वाले छात्र छात्राओं को पक्षी परिंडे भी वितरित किए गये, बच्चों को प्रतिदिन इसमें पानी डालने को कहा गया ।
कृष्ण गोपाल गोयल ने विद्यार्थियों द्वारा किए जा रहे पर्यावरणीय कार्यों का अवलोकन कर उनकी सराहना की, कार्यक्रम में लक्ष्मी नारायण बंसल, जीतमल चौहान, नलिन गोयल, विवेका शर्मा, रानू गोयल, मयंक अरोड़ा ने सहयोग प्रदान किया।
शिविर प्रभारी अनुपम गोयल ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण हेतु इस प्रकार की कार्यशालाएँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, बच्चों को बताया गया की इन सीड बाल को वह अपने जन्मदिन पर रिटर्न गिफ्ट के रूप में अपने दोस्तों व रिश्तेदारों को दे सकते हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण का एक मैसेज समाज में जायेगा।
कार्यशाला में बनाए गए सीड बॉल्स को वर्षा ऋतु में अजमेर के विभिन्न क्षेत्रों में व अरावली पहाड़ी पर बिखेरे जाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

