बालिका वधु को मिली आजादी

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बालिका वधु को मिली आजादी


पति बाल विवाह से मुकरा तो ‘सारथी’ ने दिए सबूत, कोर्ट ने किया बाल विवाह निरस्त

जोधपुर, 05 मई (हि.स.)। महज नौ साल की उम्र में बाल विवाह की बेडिय़ों में जकडऩे के बाद करीब एक दशक तक सितम झेलने के बाद बालिका वधु सीमा ने आखिरकार बाल विवाह मुक्ति की जंग जीत ली। सारथी ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी एवं पुनर्वास मनोवैज्ञानिक डॉ. कृति भारती के संबल से सीमा का बाल विवाह निरस्त हो गया। जोधपुर के पारिवारिक न्यायालय संख्या-2 के न्यायाधीश वरुण तलवार ने बाल विवाह के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए सीमा के बाल विवाह निरस्त का ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट के फैसले के बाद सीमा और उसके परिवार की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

वर्तमान में करीब 20 वर्षीय सीमा का बाल विवाह समाज के दबाव में वर्ष 2015 में जिले के एक ग्रामीण इलाके में हुआ था। उस समय उसकी उम्र करीब 9 साल थी। सीमा ने बड़ी होने पर बाल विवाह के बंधन को नकार दिया। इस बीच में सीमा को सारथी ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी और चाइल्ड एंड वूमेन राइट्स एडवोकेट डॉ. कृति भारती की बाल विवाह निरस्तीकरण मुहिम की जानकारी मिली। करीब सवा साल पहले डॉ. कृति की मदद से सीमा ने पारिवारिक न्यायालय संख्या-2 में बाल विवाह निरस्तीकरण के लिए वाद दायर किया। न्यायालय की सुनवाई के दौरान मामला उस समय नाटकीय मोड़ पर पहुंच गया, जब सीमा के पति ने बाल विवाह होने से ही इंकार कर दिया। ऐसे में सारथी ट्रस्ट की डॉ. कृति भारती ने सीमा की ओर से पैरवी करते हुए बाल विवाह से जुड़े कई दस्तावेजी साक्ष्य और पुख्ता सबूत जुटाकर न्यायालय में पेश किए। साथ ही सीमा की आयु और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को प्रमाण सहित रखा, जिससे पूरा सच अदालत के सामने उजागर हो गया। पारिवारिक न्यायालय संख्या 2 के न्यायाधीश वरुण तलवार ने प्रस्तुत साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए और लडक़े के बार-बार बदलते बयानों को भ्रामक करार देते हुए सीमा के बाल विवाह को निरस्त करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि बाल विवाह जैसी कुरीति को समाप्त करने के लिए समाज की मानसिकता में बदलाव जरूरी है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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