गणपति के जयकारों से गूंज उठी छोटी काशी: पुष्य नक्षत्र पर गणेश जी का पंचामृत अभिषेक

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गणपति के जयकारों से गूंज उठी छोटी काशी: पुष्य नक्षत्र पर गणेश जी का पंचामृत अभिषेक


गणपति के जयकारों से गूंज उठी छोटी काशी: पुष्य नक्षत्र पर गणेश जी का पंचामृत अभिषेक


गणपति के जयकारों से गूंज उठी छोटी काशी: पुष्य नक्षत्र पर गणेश जी का पंचामृत अभिषेक


गणपति के जयकारों से गूंज उठी छोटी काशी: पुष्य नक्षत्र पर गणेश जी का पंचामृत अभिषेक


जयपुर, 08 सितंबर (हि.स.)। छोटी काशी जयपुर में मंगलवार को भौम पुष्य नक्षत्र के अवसर पर प्रथम पूज्य भगवान गणेश के प्राचीन मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान हुए। मोती डूंगरी गणेश मंदिर, ब्रह्मपुरी माउंट रोड स्थित दाहिनी सूंड वाले नहर के गणेश जी मंदिर, चांदपोल स्थित परकोटा गणेश मंदिर सहित शहर के विभिन्न गणेश मंदिरों में भगवान गणपति का अभिषेक, पूजन और विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिरों में मोदकों का भोग लगाया गया और श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि तथा विघ्नों के निवारण की कामना की।

मोती डूंगरी में 251 किलो दूध से अभिषेक

महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि मोती डूंगरी गणेश मंदिर में भगवान गणपति का पंचामृत से विशेष अभिषेक किया गया। इसमें 251 किलो दूध, 50 किलो दही, 25 किलो बूरा, 11 किलो शहद और 11 किलो घी के साथ गुलाब जल, केवड़ा जल और इत्र का उपयोग किया गया। अभिषेक के बाद भगवान को चोला चढ़ाकर नवीन पोशाक और नया मुकुट धारण कराया गया। इसके बाद 1008 मोदकों का भोग लगाया गया।

मंदिर में विशेष पूजन के बाद नई ध्वजा भी चढ़ाई गई। महंत कैलाश शर्मा के अनुसार मंदिर परिवार की ओर से मुख्य ध्वजा चढ़ाने की परंपरा है, जबकि 11 अन्य ध्वजाएं श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई जाती हैं। मुख्य ध्वजा करीब 27 दिन में बदली जाती है, जबकि श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई जाने वाली अन्य ध्वजाएं समय-समय पर बदली जाती हैं। शाम से मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर शुरू हुआ। भगवान गणेश को ध्रुपद गायन प्रिय माना जाता है, इसी मान्यता के तहत ध्रुपद गायन की प्रस्तुति दी गई। भगवान को छप्पन भोग भी अर्पित किया गया।

नहर के गणेशजी मंदिर में 101 अथर्वशीर्ष पाठ

ब्रह्मपुरी माउंट रोड स्थित श्री नहर के गणेशजी मंदिर में भौम-पुष्य के अवसर पर दिनभर धार्मिक अनुष्ठान हुए। महंत पं. जय शर्मा के सान्निध्य में सुबह 8 बजे से श्री गणपति अथर्वशीर्ष के 101 पाठ किए गए। इसके बाद भगवान गणपति का दूर्वा मार्जन से अभिषेक और पूजन किया गया तथा ऋग्वेदोक्त गणपति मात्रिका के पाठ हुए।

भगवान को नवीन पोशाक धारण कराकर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ 21 मोदकों का भोग लगाया गया और शयन करवाया गया। शाम को 251 दीपकों से गणपति जी की महाआरती की गई। मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि दायक एवं विघ्ननिवारक रक्षा सूत्र और पुष्प आशीष प्रदान किए गए।

पं. जय शर्मा ने बताया कि मंगलवार को पड़ने वाला पुष्य नक्षत्र भौम-पुष्य कहलाता है। शास्त्रों में इसे तंत्र-मंत्र की सिद्धि, ऋण मुक्ति और संपत्ति संबंधी कार्यों के लिए विशेष एवं दुर्लभ संयोग माना गया है। गणेश चतुर्थी से पहले भाद्रपद कृष्ण पक्ष में इस संयोग का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है।

13 से 15 सितंबर तक गणेश जन्मोत्सव

नहर के गणेशजी मंदिर में 13 से 15 सितंबर तक त्रिदिवसीय श्री गणेश जन्मोत्सव मनाया जाएगा। गणपति को गोटा-पन्नियों से शृंगारित कर राजशाही पोशाक, स्वर्ण मंडित मुकुट और आभूषण धारण करवाए जाएंगे।

13 सितंबर को सिंजारा महोत्सव के तहत शाम 5 बजे विशेष लहरिया पोशाक और साफा धारण कर आरती दर्शन होंगे। असंख्य मोदकों की झांकी सजाई जाएगी और मेहंदी पूजन होगा। श्रद्धालुओं को सिंदूर और मेहंदी वितरित की जाएगी। 14 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के अवसर पर गणेश जन्मोत्सव के विशेष धार्मिक कार्यक्रम होंगे।

परकोटा गणेश मंदिर में 21 हजार लड्डुओं की झांकी

चांदपोल स्थित परकोटा गणेश मंदिर में भी गणेश जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। महंत अमित शर्मा के सानिध्य में मंदिर को विशेष लाइटिंग, फूलों की बंदरवाल और आकर्षक सजावट से सजाया गया है। पुष्य नक्षत्र से गणेश चतुर्थी तक धार्मिक अनुष्ठान और भक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

मंदिर महंत अमित शर्मा ने बताया कि मंगलवार को पुष्य नक्षत्र के अवसर पर भगवान गणेश का विशेष पूजन और पंचामृत अभिषेक कर महोत्सव की शुरुआत की गई। इस दौरान हवन, 108 गणपति अथर्वशीर्ष के पाठ और शाम को दीपदान हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की।

12 सितंबर को मंदिर में 21 हजार लड्डुओं की भव्य झांकी सजाई जाएगी। इसके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। 13 सितंबर को 111 किलो मेहंदी वितरण और सिंजारा उत्सव होगा। महंत परिवार की ओर से प्रथम पूज्य गणेश को मेहंदी अर्पित की जाएगी। इसके बाद महिला मंडल की ओर से बधाई गान होगा और श्रद्धालुओं को मेहंदी वितरित की जाएगी।

14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश को छप्पन भोग अर्पित कर भव्य झांकी सजाई जाएगी। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन भी होंगे।

अन्य गणेश मंदिरों में भी विशेष पूजा

इसके अलावा जयपुर स्थापना से पूर्व के प्राचीन गढ़ गणेश मंदिर में महंत प्रदीप औदीच्य के सानिध्य में पुरुषाकृति बाल गणेश का पंचामृत अभिषेक किया गया। अथर्वशीर्ष मंत्रोच्चार के साथ मोदकों का भोग लगाया गया। वहीं पुष्य नक्षत्र के अवसर पर जयपुर के प्राचीन श्वेत सिद्धि विनायक मंदिर, ध्वजा धीश जी मंदिर,गलता गेट स्थित गीता गायत्री गणेश मंदिर, दिल्ली रोड स्थित आत्माराम गणेश ब्रह्मचारी मंदिर, आगरा रोड स्थित गंगोत्री गणेश मंदिर सहित अन्य गणेश मंदिरों में भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। भगवान गणेश का अभिषेक कर नवीन पोशाक धारण कराई गई और मोदकों का भोग लगाया गया। मंदिरों में दिनभर दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही रही और गणपति के जयकारों से धार्मिक वातावरण बना रहा। पुष्य नक्षत्र के साथ ही जयपुर के गणेश मंदिरों में गणेश चतुर्थी के लिए धार्मिक आयोजनों का सिलसिला शुरू हो गया है। आगामी दिनों में विभिन्न मंदिरों में भजन-कीर्तन, हवन, अथर्वशीर्ष पाठ, मोदक झांकियां, सिंजारा उत्सव और छप्पन भोग सहित कई आयोजन होंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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