जयपुर में बहेगी धर्म-ज्ञान की गंगा

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जयपुर में बहेगी धर्म-ज्ञान की गंगा


जयपुर, 24 जुलाई (हि.स.)। राजस्थान की राजधानी और विश्व भर में 'जैन नगरी' के रूप में विख्यात गुलाबी नगरी जयपुर में इस वर्ष 50 दिगंबर जैन संतों और आर्यिका माताजी के चातुर्मास 15 विभिन्न स्थानों पर संपन्न होंगे। आगामी चार महीनों तक शहर में तप, त्याग, ज्ञान और धार्मिक-सामाजिक गतिविधियों की अविरल धारा बहेगी। रविवार, 26 जुलाई से चातुर्मासिक आयोजनों की शुरुआत हो रही है। इस दिन तीन स्थानों पर संतों के मंगल प्रवेश होंगे, वहीं तीन अन्य स्थलों पर वर्षायोग मंगल कलश स्थापना समारोह आयोजित किए जाएंगे।

सांगानेर चित्रकूट कॉलोनी में 11 वर्ष बाद जयपुर पधारे क्षमा मूर्ति आचार्य विशद सागर महाराज ससंघ के 33वें चातुर्मास की मंगल कलश स्थापना प्रातः 8 बजे श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में होगी। मुख्य समारोह कंवर का बाग में आयोजित होगा। इसी कड़ी में जनकपुरी में आचार्य आदित्य सागर महाराज ससंघ का मंगल कलश स्थापना समारोह प्रातः 8 बजे श्री दिगंबर जैन मंदिर में संपन्न होगा। मंगल विहार कॉलोनी में आर्यिका अर्हम मति माताजी ससंघ का पहली बार जयपुर में चातुर्मास हो रहा है। कलश स्थापना दोपहर 1 बजे श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में होगी। मानसरोवर, मीरा मार्ग पर निर्यापक मुनि विलोक सागर एवं विमोध सागर महाराज ससंघ का प्रातः मंगल प्रवेश श्री आदिनाथ मंदिर में होगा। कलश स्थापना 2 अगस्त की जाएगी। मानसरोवर, वरुण पथ पर गणिनी आर्यिका विभा श्री माताजी ससंघ का प्रातः 8 बजे भव्य मंगल प्रवेश श्री दिगंबर जैन मंदिर में होगा। कलश स्थापना: 2 अगस्त की जाएगी । वहीं मुरलीपुरा में आर्यिका सुकाव्य मति माताजी ससंघ का प्रथम चातुर्मास प्रातः सवा 7.15 बजे श्री महावीर मंदिर में प्रवेश होगा । वहीं कलश स्थापना 2 अगस्त की जाएगी। इसके अलावा विवेक विहार में आर्यिका सुविज्ञ मति माताजी, चौमू में आर्यिका नंदीश्वर मति माताजी, उगरियावास में मुनि सुमंत्र सागर महाराज तथा आसपास के ग्रामीण व बाहरी क्षेत्रों फागी, जोबनेर, केकड़ी, गुंशी) में भी जैन संतों के चातुर्मास तय हुए हैं।

प्रतिष्ठाचार्य पं. प्रद्युम्न जैन शास्त्री एवं विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि जैन संत वर्षा ऋतु में सूक्ष्म जीवों की रक्षा हेतु चार माह एक ही स्थान पर रहकर आत्म-कल्याण और जन-कल्याण के लिए तपस्या करते हैं। 29 जुलाई बुधवार को गुरु पूर्णिमा पर्व पूरे श्रद्धाभाव से मनाया जाएगा। 30 जुलाई गुरुवार को श्रावण कृष्ण एकम को भगवान महावीर का प्रथम देशना दिवस 'वीर शासन जयंती' के रूप में मनाया जाएगा, जिस पर संतों के विशेष प्रवचन होंगे। 9 नवंबर सोमवार को कार्तिक कृष्ण अमावस्या को चातुर्मास निष्ठापन समारोह आयोजित होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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