बदलते मौसम व बिगड़ती जीवनशैली से बढ़ रहीं बीमारियां, सतर्कता ही बचाव: विशेषज्ञ

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बदलते मौसम व बिगड़ती जीवनशैली से बढ़ रहीं बीमारियां, सतर्कता ही बचाव: विशेषज्ञ


अजमेर, 6 अप्रैल(हि.स.)। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में आयोजित जागरूकता संगोष्ठी में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बदलते मौसम और आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न स्वास्थ्य चुनौतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान में मौसम का स्वरूप अत्यंत अनिश्चित हो गया है। गर्मी में बारिश और वर्षा ऋतु में सूखे जैसी स्थितियां शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर रही हैं। इसके चलते लोग बार-बार वायरल संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं, जिससे सर्दी, खांसी और बुखार जैसी समस्याएं लोगों में दीर्घकालिक होती देखी जा रही हैं।

वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गुप्ता और डॉ. विवेक माथुर ने कम उम्र में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों पर चिंता जताते हुए बताया कि तनाव, अनियमित दिनचर्या, असंतुलित आहार और शारीरिक निष्क्रियता इसके प्रमुख कारण हैं। उन्होंने नियमित व्यायाम, संतुलित खानपान और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को आवश्यक बताया। उनका कहना था कि हर रोग पहले संकेत देता है, जिन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। शरीर में किसी भी तरह के संकेत को तुरंत अपने चिकित्सक से साझा करें और उचित मार्गदर्शन प्राप्त करें। उन्होंने बताया कि अत्याधुनिक तकनीक से ह्रदय रोगियों का उपचार अजमेर में संभव है।

नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ चक्रपाणि मित्तल ने किडनी संबंधी बीमारियों के बढ़ते मामलों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गलत खानपान, दवाइयों का अनियंत्रित उपयोग और पानी की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। उन्होंने पर्याप्त जल सेवन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किडनी रोग लाइलाज नहीं रहा। किडनी रोगी का उपचार संभव है बशर्ते है कि रोगी को रोग शुरू होने के प्रारंभिक चरण में ही उपचार मिलना शुरू हो जाए। आमतौर पर बिना चिकत्सकीय परामर्श के दर्द निवारक गोलियों का सेवन करने, रोग के संकेतों को नजरअंदाज करने, अनियंत्रित डायबिटीज से पीड़ित,खानपान में परहेज नहीं रखने वालों को किडनी रोग होने की संभावना ज्यादा होती है।

ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रजत चौधरी ने बच्चे, बूढे और जवान चाहे वह स्त्री हो अथवा पुरुष सभी में कैंसर रोग के मामलों में वृद्धि पर चिंता जाहिर की। उन्होंने धूम्रपान,तंबाकू और जर्दा के बढ़ते सेवन को कैंसर के मामलों में वृद्धि का मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि धूम्रपान न केवल व्यक्ति बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी हानिकारक है। न्यूरो सर्जन डॉ ए आर गौरी ने बताया कि वर्तमान समय में लोग सर्वाइकल और साइटिका जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं, जो लंबे समय तक बैठकर काम करने, मोबाइल स्क्रीन टाइम बढ़ने और गलत शारीरिक मुद्रा का परिणाम हैं। उन्होंने बताया कि समस्या यहां आती है कि जब रोगी तुरंत ही ठीक तो होना चाहता है किन्तु इसके लिए पांच दिन बिस्तर पर लेटकर विश्राम करना नहीं चाहता। उसे चिकित्सक की यह सलाह गलत लगती है, जबकि इन रोगों से बचाव ही उपचार से ज्यादा कारगर हैं जो स्वयं को जांचनें, जीवनशैली में जहां जरूरत है बदलाव लाने और नियमित व्यायाम करने में है।

गेस्टोएंट्र्रोलॉजिस्ट डॉ एसपी जिंदल, यूरोलॉजिस्ट डॉ संतोष घाकड़, नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ रोमेश गौतम, चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ सुनील गोयल, डॉ प्रशांत माथुर एवं डॉ प्रीति गर्ग, जनरल फिजीशियन डॉ संदीप बघे, डॉ शिखा गुप्ता, डॉ प्रशांत शर्मा, पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ मुकेश गोयल, डॉ प्रतीक कोठारी, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ ऋषभ कोठारी, आॅप्थोलॉजिस्ट डॉ गोपाल दमानी, गायनेकोलॉजिस्ट डॉ स्मिता चपलोत डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ डिम्पल राजपुरोहित आदि विशेषज्ञों ने भी मौसम में परिवर्तन के कारण होने वाली समस्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए खान—पान को नियंत्रित रखने, नियमित चिकित्सकीय परामर्श एवं शारीरिक जांच की सलाह दी। संगोष्ठी के अंत में चिकित्सकों ने आमजन से अपील की कि वे स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें, नियमित जांच कराएं और संतुलित जीवनशैली अपनाकर बीमारियों से बचाव करें। कार्यक्रम का संयोजन वरिष्ठ जनसम्पर्क प्रबंधक संतोष कुमार गुप्ता ने किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

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