गोकाष्ठ से करें होलिका दहन,पर्यावरण रहेगा सुरक्षित : जोराराम कुमावत

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गोकाष्ठ से करें होलिका दहन,पर्यावरण रहेगा सुरक्षित : जोराराम कुमावत


जयपुर, 01 मार्च (हि.स.)। पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने रंगों और खुशियों के पावन पर्व होली की प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं एवं बधाई दी है। उन्होंने कहा कि ईश्वर करे यह होली आपके जीवन में प्यार सौहार्द और सकारात्मकता के नए रंग भर दे। बुराइयों को मिटाकर जीवन में सुख-समृद्धि की बहार आए।

कुमावत ने इस बार होलिका दहन के लिए गोकाष्ठ के उपयोग पर बल देते हुए कहा कि स्वच्छ और हरा-भरा पर्यावरण मानव जीवन का मूल आधार है। इसी सकारात्मक सोच को लेकर इस बार होलिका दहन गाय के गोबर की लकड़ी यानी गोकाष्ठ से करें। गोकाष्ठ से होलिका दहन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसके जरिये आप गोसंवर्धन का पुण्य भी अर्जित कर सकते हैं। गोकाष्ठ के इस्तेमाल से हम कहीं न कहीं गाय के संवर्धन की दिशा में एक सार्थक कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि गोकाष्ठ से होलिका दहन को शास्त्र सम्मत भी बताया गया है। यह जैविक ईंधन भी है। यह लकड़ी की तुलना में पर्यावरण के ज्यादा अनुकूल है। गोकाष्ठ जलने पर कम धुआं और कम कार्बन का उत्सर्जन करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इसके प्रयोग से प्रदूषण लकड़ी की तुलना में 35 प्रतिशत कम होता है। गोकाष्ठ का धुआं वातावरण को प्रदूषित करने के बजाय शुद्ध करता है। साथ ही यह लकड़ी की तुलना में ज्यादा तेजी से जलता है। गोकाष्ठ के इस्तेमाल से इसकी बची हुई राख भी हमारे काम की है। आप इसे अपने बगीचे में बिखेर सकते हैं। यह जमीन की उर्वरक क्षमता तो बढ़ाएगी ही, साथ ही प्राकृतिक कीटनाशक का काम भी करेगी। यदि गोकाष्ठ उपलब्ध न हो तो आप लकड़ी के स्थान पर गाय के गोबर से निर्मित कंडों से होलिका दहन कर गो संरक्षण एवं पर्यावरण के प्रति दायित्व निभा सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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