राजस्थान में कल बजेगा पंचायत चुनाव का बिगुल, घोषित होगा कार्यक्रम
जयपुर, 02 अक्टूबर (हि.स.)। राजस्थान में पंचायतीराज चुनावों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग शनिवार को दोपहर 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पंचायतीराज चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेगा। चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। चुनाव चार चरणों में कराए जाने की संभावना है।
इन चुनावों में ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव मतपत्र से, जबकि पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के चुनाव ईवीएम के माध्यम से कराए जाने की तैयारी है। पंचायतीराज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों पर भी निर्वाचन संबंधी नियम लागू हो जाएंगे।
पंचायतीराज चुनावों में प्रदेशभर में करीब 1.69 लाख जनप्रतिनिधियों के चुने जाने की तस्वीर सामने आ रही है।
इनमें 1,403 जिला परिषद सदस्य और 8,245 पंचायत समिति सदस्य शामिल हैं। जिला परिषद सदस्य मिलकर 41 जिला प्रमुखों का तथा पंचायत समिति सदस्य 457 प्रधानों का चुनाव करेंगे।
वहीं प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच, उपसरपंच और करीब 1.30 लाख वार्ड पंचों के चुनाव होंगे। प्रस्तावित आंकड़ों के अनुसार 7,200 महिला सरपंच चुनी जाएंगी, जबकि 1,30,584 वार्ड पंच पदों में से करीब 65 हजार पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
आरक्षण व्यवस्था के तहत प्रदेश के 41 जिला प्रमुखों में से 20 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। वहीं 457 पंचायत समितियों में से 221 में महिला प्रधान चुनी जाएंगी।
जयपुर और जोधपुर में 11-11 महिला प्रधान बनने की स्थिति रहेगी। बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर में पंचायत समिति प्रधान के पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
सरपंच पदों में अनुसूचित जनजाति के लिए 3,058, अनुसूचित जाति के लिए 2,493 और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 1,961 पद आरक्षित बताए गए हैं। बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर में सरपंच के सभी 1,253 पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो जाएगी। इसके बाद चुनाव प्रक्रिया से जुड़े क्षेत्रों में सरकारी घोषणाओं, राजनीतिक गतिविधियों और प्रशासनिक कार्यों पर निर्वाचन संबंधी नियम लागू होंगे। चुनाव अवधि में तबादलों पर भी पाबंदी रहने की संभावना है।
चुनाव प्रक्रिया को करीब दो महीने में पूरा करने की तैयारी की जानकारी सामने आई है।
पंचायतीराज चुनावों को लेकर गांवों में राजनीतिक गतिविधियां पहले से तेज हैं। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य चुने जाने के बाद इन्हीं निर्वाचित सदस्यों के बीच से जिला प्रमुख और प्रधान का चुनाव होगा। ऐसे में सदस्य संख्या के लिहाज से जिला परिषद और पंचायत समितियों में बनने वाले समीकरण आगे की स्थानीय राजनीतिक तस्वीर तय करेंगे।
राज्य निर्वाचन आयोग की शनिवार को होने वाली घोषणा के बाद नामांकन, मतदान, मतगणना और प्रधान-जिला प्रमुख के चुनाव की वास्तविक तारीखों को लेकर स्थिति साफ हो जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

