जयपुर नगर निगम में भाजपा का बोर्ड तय, 146 वार्डों के नतीजे जारी; चार वार्डों में री-पोल के बाद तस्वीर होगी साफ
जयपुर, 14 सितंबर (हि.स.)। जयपुर नगर निगम के चुनाव परिणामों में भाजपा ने बढ़त बनाते हुए 78 वार्डों में जीत दर्ज की है। कांग्रेस को 53 और निर्दलीय प्रत्याशियों को 15 सीटें मिली हैं। निगम के 150 वार्डों में से 146 के नतीजे जारी हो चुके हैं। इस लिहाज से भाजपा ने बहुमत के लिए जरूरी 76 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया है और उसका बोर्ड बनना तय माना जा रहा है। हालांकि वार्ड 9, 18, 25 और 34 के पांच बूथों पर पुनर्मतदान के बाद ही निगम की अंतिम चुनावी तस्वीर स्पष्ट होगी।
इन चार वार्डों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में तकनीकी दिक्कत के कारण कुछ बूथों पर पुनर्मतदान कराया जाएगा। इसके चलते इन वार्डों के परिणाम फिलहाल लंबित हैं। शेष 146 वार्डों के नतीजों में भाजपा ने कांग्रेस से 25 सीटों की बढ़त बनाई है। निर्दलीयों ने भी 15 वार्डों में जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक मौजूदगी कायम रखी है, लेकिन उपलब्ध परिणामों के आधार पर बोर्ड गठन के लिए भाजपा को किसी अन्य दल या निर्दलीय के समर्थन की जरूरत नहीं है।
चुनाव परिणामों में भाजपा और कांग्रेस के कई प्रमुख चेहरों की हार ने स्थानीय राजनीति में चर्चा तेज कर दी है। वार्ड 110 में जयपुर की पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को कांग्रेस की सुनीता मेठी ने पराजित किया। ज्योति खंडेलवाल अपने किसी भी बूथ पर बढ़त हासिल नहीं कर सकीं। पूर्व मेयर की हार कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, जबकि भाजपा के लिए यह प्रमुख झटका है।
वार्ड 35 में भाजपा नेता विमल कटियार को निर्दलीय प्रत्याशी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। यह परिणाम बताता है कि पार्टी के मजबूत संगठन के बावजूद कुछ वार्डों में स्थानीय स्तर के समीकरण और प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ निर्णायक रही। वार्ड 49 में कांग्रेस के धर्मसिंह सिंघानिया ने भाजपा के मुकेश शर्मा (काका) को हराया।
वार्ड 113 में निर्दलीय प्रत्याशी गजनफर अली ने 10,014 मतों के रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज की। यह परिणाम निर्दलीय खेमे के प्रभाव को रेखांकित करता है। वहीं वार्ड 124 में मुकाबला बेहद करीबी रहा, जहां कांग्रेस की कांता देवी ने महज पांच मतों के अंतर से जीत हासिल की। इस तरह जयपुर के चुनाव परिणामों में एक ओर भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला है, तो दूसरी ओर कई वार्डों में स्थानीय स्तर पर कड़े मुकाबले और राजनीतिक उलटफेर भी देखने को मिले हैं।
जयपुर नगर निगम में भाजपा के पास बहुमत होने से बोर्ड गठन का रास्ता साफ हो गया है। अब पार्टी के सामने प्रमुख चुनौती निगम के संचालन, पार्षदों के बीच समन्वय और शेष चार वार्डों के पुनर्मतदान के बाद बनने वाली स्थिति को संभालने की होगी। दूसरी ओर कांग्रेस के लिए यह परिणाम विपक्ष की भूमिका को मजबूत करने और संगठनात्मक स्तर पर चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा करने का अवसर है।
चार वार्डों के पांच बूथों पर पुनर्मतदान के बाद ही सभी 150 वार्डों का अंतिम आंकड़ा सामने आएगा। हालांकि लंबित परिणामों से भाजपा के बोर्ड गठन पर फिलहाल कोई प्रभाव पड़ता नहीं दिख रहा है, लेकिन इन वार्डों के नतीजे विपक्ष की कुल संख्या और निगम के राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

