बीकानेर का चरित्र शुरू से ही मस्त मौला स्वभाव का, शिक्षित और सजग नागरिक ही असली पहचान : डाॅ. बृजरतन

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बीकानेर का चरित्र शुरू से ही मस्त मौला स्वभाव का, शिक्षित और सजग नागरिक ही असली पहचान : डाॅ. बृजरतन


बीकानेर, 19 अप्रैल (हि.स.)। नगर स्थापना दिवस समारोह आयोजन समिति और नंदलाल जोशी चैरिटेबल फाउंडेशन की ओर से शनिवार को होटल राजमहल में “नगर का चरित्र और नागरिकों का दायित्व” विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि शहर का चरित्र उसके नागरिकों की जागरूकता, जिम्मेदारी और सक्रिय सहभागिता से ही साकार होता है।

संगोष्ठी में डूंगर कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. बृज रतन जोशी ने कहा कि बीकानेर नगर की स्थापना बहुत ही वस्तु कला के साथ की गई थी इसी कारण इस शहर का चरित्र शुरू से ही मस्त मौला स्वभाव का रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षित और सजग नागरिक ही शहर की असली पहचान होते हैं। जोशी ने नगर चरित्र पर विचार से उदाहरण सहित अनेक तथ्य भी पेश किये। वहीं डॉ. नितिन गोयल ने नागरिकों को अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर होने का आह्वान किया। डॉ. संजय आचार्य ने सामाजिक सहभागिता को नगर विकास की आधारशिला बताया, जबकि डॉ. विठ्ठल बिस्सा ने प्रशासन और आमजन के बेहतर समन्वय पर जोर दिया। जार के प्रदेश अध्यक्ष श्याम मारू ने जागरूक नागरिकों को सशक्त समाज की नींव बताया और जार के जिलाध्यक्ष पत्रकार प्रमोद आचार्य ने स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी निभाने की आवश्यकता जताई।

पूर्व महापौर मकसूद अहमद ने स्वच्छता और अनुशासन को शहर की छवि का आधार बताया तो नरेश गोयल ने ऐसे आयोजनों को नागरिक चेतना बढ़ाने वाला कहा।

जोधपुर से आए सुनील पुरोहित ने परंपरा और आधुनिकता के संतुलन पर बल दिया, वहीं श्याम नारायण रंगा ने प्रत्येक नागरिक से शहरहित में सोचने का आह्वान किया। पीयूष सिंह ने युवाओं की भागीदारी को विकास का प्रमुख आधार बताया और रमनदीप कौर ने महिलाओं की सक्रिय भूमिका को समाज की मजबूती से जोड़ा। बीएम रामावत ने सामूहिक प्रयासों से सकारात्मक बदलाव संभव बताए, जबकि सुषमा बिस्सा ने संस्कार और जिम्मेदारी को नगर के चरित्र निर्माण का आधार कहा। लक्ष्मी पारीक ने नागरिक अनुशासन को विकास की कुंजी बताया और प्रो. श्रीकांत व्यास ने शिक्षा को जागरूकता का सबसे बड़ा माध्यम बताया। पूजा मोहता ने सकारात्मक सोच की आवश्यकता पर जोर दिया। महेंद्र जोशी ने नागरिक कर्तव्यों के पालन को अनिवार्य बताया और साहित्यकार मोनिका गौड़ ने साहित्य व संस्कृति को शहर की आत्मा को सशक्त बनाने वाला बताया।कार्यक्रम में डॉ रीतेश, श्रेयांश जैन, शालू गहलोत, व्यवसायी वेद अग्रवाल ने भी अपने विचार प्रकट किये।

कार्यक्रम की शुरुआत में संयोजक ज्योति प्रकाश रंगा ने संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला तथा अंत में रविंद्र हर्ष ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में शहर के कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

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