भद्रा और चंद्रग्रहण ने बढ़ाया संशय: होली की तारीख पर चर्चा तेज
जयपुर, 23 फ़रवरी (हि.स.)। होली के त्योहार की तारीख को लेकर इस बार लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई है। इसकी मुख्य वजह फाल्गुन पूर्णिमा पर पड़ रहा चंद्रग्रहण, भद्रा का प्रभाव और अलग-अलग राज्यों में घोषित अवकाश हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन, चंद्रग्रहण और रंगों की होली तीन अलग-अलग दिनों में होगी।
ज्योतिष परिषद एवं शोध संस्थान के अध्यक्ष डॉ. पुरुषोत्तम गौड़ के अनुसार इस बार फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण लग रहा है, इसलिए परंपरागत समय में होलिका दहन संभव नहीं है। भद्रा के कारण 2 मार्च को प्रदोष काल में होलिका दहन शास्त्र सम्मत नहीं माना गया है। ऐसे में भद्रा समाप्ति के बाद रात्रि के चौथे प्रहर में होलिका दहन करना उचित रहेगा। उन्होंने बताया कि 2 मार्च की देर रात लगभग 1:25 से 2:37 बजे के बीच होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। वहीं सूर्योदय से पहले 3 मार्च सुबह 5:19 से 6:55 बजे तक भी दहन किया जा सकता है।
इस वर्ष 3 मार्च को दोपहर 3:21 बजे से शाम 6:47 बजे तक चंद्रग्रहण रहेगा, जो भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का सूतक नौ घंटे पहले से प्रभावी हो जाता है। इस आधार पर सुबह करीब 6:21 बजे से सूतक लग जाएगा। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद किए जाते हैं और पूजा-पाठ, भोजन तथा अन्य शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। इसी कारण ग्रहण वाले दिन रंग-गुलाल खेलना भी शुभ नहीं माना जा रहा।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 3 मार्च की शाम ग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्धिकरण और स्नान किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 4 मार्च को धुलंडी और रंगों की होली मनाई जाएगी।
उधर सरकारी अवकाश को लेकर भी लोगों में असमंजस बना हुआ है। राजस्थान सरकार ने 2 मार्च को होलिका दहन और 3 मार्च को धुलंडी का अवकाश घोषित किया है, जबकि दिल्ली और हरियाणा में होली का अवकाश 4 मार्च को रखा गया है। इस कारण लोगों के बीच त्योहार की सही तारीख को लेकर चर्चा बनी हुई है।
सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव नवीन जैन के अनुसार राज्य सरकार के अवकाश भारत सरकार के कैलेंडर के अनुसार घोषित किए जाते हैं। वहीं कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पंचांग एक होने के बावजूद अलग-अलग राज्यों में अलग तिथियों पर अवकाश से भ्रम की स्थिति बनती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

