मुमुक्षु डिम्पल गोलछा भागवती दीक्षा लेकर साध्वी रामामृतम श्रीजी बनी
बीकानेर, 24 अक्टूबर (हि.स.)। साधुमार्गी जैन संघ के आचार्य प्रवर रामलालजी म.सा. उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि ने शनिवार को छबीली घाटी के सेवा सदन में सादगीपूर्ण पूर्ण धार्मिक-आध्यात्मिक कार्यक्रम में अभयनपुर, नगरी, छतीसगढ़ की डिम्पल गोलछा को भागवती दीक्षा प्रदान की। चतुर्विद संघ की साक्षी, देव, गुरु व धर्म तथा ’’हर्ष-हर्ष जय-जय’ के जयकारों के साथ 37 वर्षीय मुमुक्षु डिम्पल साध्वी रामामृतम् श्रीजी बन गई।
मुमुक्षु के माता पिता कांता देवी एवं सांंगी लाल गोलछा तथा वीर परिवार सांगीदास गोलछा परिवार के अन्य परिजनों का शनिवार को अग्रसेन भवन में अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ के राष्ट्रीय महामंत्री सुरेश बच्छावत, साधुमार्गी सेवा समिति के अध्यक्ष कन्हैयालाल बैद, कार्याध्यक्ष सुरेन्द्र दस्साणी, अहिंसा प्रचारक महेश नाहटा, बजरंग बक्शी, जितेन्द्र लालानी, समिति उपाध्यक्ष राजेन्द गोलछा, महिला समिति अध्यक्ष ललिता बांठिया, बहूमंडल अध्यक्ष मोनिका कोठारी आदि ने अभिनंदन किया। इस अवसर पर साधुमार्गी सेवा समिति के अध्यक्ष कन्हैयालाल बैद के नेतृत्व में ’’ देने वाला राम’ दिलाने वाला राम’’ तथा गुरु भक्ति ’’ राम गुरु विराट है, दीक्षाओं का ठाठ है’’ के नारे लगाए गए।
वरिष्ठ श्रावक सुशील बैद ने बताया कि सादगी पूर्ण एवं आडम्बर मुक्त इस दीक्षा महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता बिना किसी प्रकार की पूर्व सूचना के बिना यह पूर्ण सादगी पूर्ण तरीके आयोाजन हुआ। ना कोई ढोल-नगाड़ा था और न ही किसी प्रकार का दिखवा या आडम्बर । यह जैन धर्म के मूल सिद्धान्तों (अपरिग्रह और सादगी) का अत्यन्त सुन्दर जीवंत उदाहार प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया कि आचार्य श्री रामलालजी के युवाचार्य काल में अब तक 495 दीक्षाएं हो चुकी है, जो जिन शासन की असीम प्रभावना का प्रतीक है। आचार्यश्री ने बीकानेर के जूनागढ़ किला परिसर में 7 मार्च 1992 को संघ की विपुल उपस्थिति में आचार्यश्री नाना लालजी ने मुनिवर राम लालजी ने युवाचार्य की पदवीं प्रदान तथा उदयपुर में संघ का सर्वोच्च आचार्य का पद ग्रहण किया था।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

