कैंसर पर हंसराज चौधरी की अंग्रेजी में शोध पुस्तक का विमोचन

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कैंसर पर हंसराज चौधरी की अंग्रेजी में शोध पुस्तक का विमोचन


कैंसर पर हंसराज चौधरी की अंग्रेजी में शोध पुस्तक का विमोचन


भीलवाड़ा, 04 मई (हि.स.)। भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद अब वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है। इसी क्रम में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने भीलवाड़ा जिले के श्रीनवग्रह आश्रम सेवा संस्थान के संस्थापक वैद्य हंसराज चौधरी द्वारा लिखित अंग्रेजी पुस्तक कैंसर थ्रू आयुर्वेदिक लैंस (रिर्सोस, रिजन, रैमेडी) का सादे समारोह में विमोचन किया। मंत्री जाधव ने कहा कि केंद्र सरकार पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य ढांचे के साथ जोड़कर मजबूत और टिकाऊ हेल्थ सिस्टम बनाने पर काम कर रही है। आयुर्वेद की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता भारत के लिए गौरव की बात है।

मंत्री जाधव ने औषधीय पौधों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि सड़कों के किनारे इनके रोपण की योजना बनाई जा रही है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ आयुर्वेद के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। उन्होंने राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्डकी पहल का जिक्र करते हुए बताया कि यह संस्था वर्षों से औषधीय पौधों के संरक्षण और विकास में अहम भूमिका निभा रही है। वहीं, ई-चरक प्लेटफॉर्म किसानों को बाजार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रहा है।

वैद्य हंसराज चौधरी ने बताया कि आयुर्वेद को अक्सर परंपरागत या सीमित दायरे में देखा जाता रहा है, लेकिन उनकी यह पुस्तक इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करती है। अंग्रेजी भाषा में लिखी गई यह पुस्तक आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का माध्यम बनेगी। पुस्तक में कैंसर के विभिन्न प्रकार, उनके लक्षण, कारण, जांच और उपचार का समग्र विवरण दिया गया है। खास बात यह है कि इसमें आयुर्वेद के साथ एलोपैथी और होम्योपैथी का संतुलित समावेश किया गया है, जिससे यह चिकित्सा जगत में एक समन्वित दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। वैद्य चौधरी के अनुसार, श्रीनवग्रह आश्रम में कैंसर सहित गंभीर रोगों का उपचार डब्ल्यूएचओ और आयुष मंत्रालय की गाइडलाइंस के अनुसार किया जा रहा है। आयुर्वेद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर बीमारी को जड़ से खत्म करने में सहायक होता है, जिससे मरीज को दीर्घकालिक राहत मिलती है। इस पुस्तक का प्रकाशन भारत के साथ लंदन में भी किया गया है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय पाठकों तक पहुंच रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मूलचंद

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