विश्व अंगदान दिवस पर रेलवे अस्पताल में जागरूकता कार्यशाला, लोगों ने लिया नेत्रदान का संकल्प

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विश्व अंगदान दिवस पर रेलवे अस्पताल में जागरूकता कार्यशाला, लोगों ने लिया नेत्रदान का संकल्प


काेटा, 17 अगस्त (हि.स.)। एक व्यक्ति का अंगदान जरूरतमंद 9 लोगों को नया जीवन दे सकता है। इसी संदेश के साथ विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर मंडल रेल चिकित्सालय, कोटा के बहिरंग विभाग में ‘अंगदान जीवन संजीवनी’ अभियान के तहत अंगदान जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुपर्णा सेन रॉय के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में आयोजित कार्यशाला में अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के साथ इसके महत्व और आवश्यकता की जानकारी दी गई।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता शाइन इंडिया फाउंडेशन के सीनियर ट्रांसप्लांट कॉर्डिनेटर डॉ. कुलवंत गौड़ ने बताया कि सामान्य मृत्यु की स्थिति में नेत्रदान और त्वचा दान किया जा सकता है। वहीं, ब्रेन डेड होने की अवस्था में किडनी, लिवर, लंग्स, हार्ट, अग्न्याशय और आंतों जैसे महत्वपूर्ण अंगों का दान संभव है। उन्होंने बताया कि अंगदान के संबंध में अधूरी जानकारी के कारण प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक लोग अंगों की कमी के चलते मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि एक ब्रेन डेड दिवंगत व्यक्ति के अंगदान किए जाएं तो इससे 9 लोगों का जीवन बचाया जा सकता है।

नेत्रदान को लेकर भी डॉ. गौड़ ने कई भ्रांतियों को दूर किया। उन्होंने बताया कि मृत्यु के बाद 6 से 8 घंटे तक नेत्रदान संभव है। नेत्रदान में पूरी आंख नहीं ली जाती, बल्कि आंख के सामने का पारदर्शी हिस्सा कॉर्निया लिया जाता है। इसलिए नेत्रदान के बाद चेहरे की बनावट में किसी प्रकार की विकृति नहीं आती।

कार्यशाला में अस्पताल के सभी वरिष्ठ चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ तथा ओपीडी में उपचार के लिए आए 150 से अधिक मरीज शामिल हुए। जागरूकता कार्यक्रम के बाद करीब 15 लोगों ने नेत्रदान के संकल्प पत्र भरे। अपर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुषमा भटनागर एवं डॉ. राजन गुप्ता ने भी नेत्रदान का संकल्प लेकर इस पहल को समर्थन दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

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