प्रदेश में बनेंगे विमान, हेलीकॉप्टर, रडार, ड्रोन, मिसाइल और एवियोनिक्स

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प्रदेश में बनेंगे विमान, हेलीकॉप्टर, रडार, ड्रोन, मिसाइल और एवियोनिक्स


जयपुर, 21 मार्च (हि.स.)। राजस्थान सरकार ने औद्योगिक और सामरिक क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए “राजस्थान एयरोस्पेस और डिफेंस पॉलिसी-2026” को लागू किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की इस पहल का उद्देश्य राज्य को एयरोस्पेस और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक मजबूत केंद्र के रूप में विकसित करना है। यह नीति न केवल प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई दिशा देगी, बल्कि देश की सामरिक आत्मनिर्भरता को भी मजबूती प्रदान करेगी।

इस नीति के अंतर्गत राजस्थान में विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, मिसाइल, एवियोनिक्स, सैटेलाइट बस, बख्तरबंद वाहन, रडार और संचार एवं नियंत्रण प्रणालियों जैसे अत्याधुनिक उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही रोबोटिक्स और डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है, जिससे राज्य आधुनिक तकनीकी उत्पादन के केंद्र के रूप में उभर सके।

नीति का मूल उद्देश्य एयरोस्पेस और डिफेंस वैल्यू चेन में मैन्युफैक्चरिंग, अनुसंधान, परीक्षण और सेवाओं को प्रोत्साहित करना है।

इसके माध्यम से एक ऐसा इकोसिस्टम विकसित करने की परिकल्पना की गई है, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो। इसमें ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (ओईएम), सिस्टम इंटीग्रेटर्स, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई), स्टार्टअप्स और कौशल विकास संस्थानों को भी सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

राज्य की भौगोलिक स्थिति और औद्योगिक आधार भी इस दिशा में सहायक माने जा रहे हैं। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से कनेक्टिविटी, राष्ट्रीय राजमार्गों का व्यापक नेटवर्क, पर्याप्त भूमि की उपलब्धता और धातु संसाधनों की सहज पहुंच राजस्थान को इस क्षेत्र में निवेश के लिए आकर्षक बनाती है।

यहां का मजबूत ऑटोमोटिव और मेटल सेक्टर रक्षा उपकरणों और उनके पुर्जों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

नीति के तहत निवेश को बढ़ावा देने के लिए परियोजनाओं को लार्ज, मेगा और अल्ट्रा मेगा श्रेणियों में विभाजित किया गया है, ताकि अलग-अलग स्तर के निवेशकों को अवसर मिल सके। साथ ही निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रकार के वित्तीय और गैर-वित्तीय प्रोत्साहन भी दिए गए हैं। इनमें पूंजीगत अनुदान, टर्नओवर आधारित प्रोत्साहन, बिजली शुल्क में छूट, स्टाम्प शुल्क में रियायत और लचीली भूमि भुगतान व्यवस्था जैसे प्रावधान शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, कौशल विकास, हरित प्रोत्साहन और बौद्धिक संपदा सृजन को भी विशेष महत्व दिया गया है।

यह नीति केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, डिफेंस प्रोडक्शन एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी और आईडेक्स के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए तैयार की गई है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में जो प्रगति हुई है, यह नीति उसे राज्य स्तर पर और आगे बढ़ाने का प्रयास है।

कुल मिलाकर, यह पहल राजस्थान को केवल एक औद्योगिक राज्य के रूप में ही नहीं, बल्कि देश की रक्षा उत्पादन क्षमता में अहम योगदान देने वाले केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में इससे निवेश, रोजगार और तकनीकी नवाचार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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