अरावली संरक्षण और डीएपी संकट पर अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार को घेरा
जयपुर, 09 अक्टूबर (हि.स.)। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और प्रदेश में डीएपी खाद की कथित किल्लत को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। गहलोत ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर दो अलग-अलग पोस्ट के जरिए पर्यावरण संरक्षण और किसानों की समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने अरावली को राजस्थान की जीवनरेखा बताते हुए इसके संरक्षण की मांग की, वहीं डीएपी खाद की कमी और कथित कालाबाजारी को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।
गहलोत ने अपनी पोस्ट में बताया कि सुप्रीम कोर्ट की उच्चस्तरीय समिति 11 से 13 अक्टूबर तक डूंगरपुर, बांसवाड़ा और उदयपुर का दौरा करेगी। उन्होंने कहा कि 12 अक्टूबर को बांसवाड़ा के जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग (टीएडी) सभागार में सार्वजनिक परामर्श आयोजित होगा। गहलोत ने उम्मीद जताई कि इस बार समिति आमजन और पर्यावरण प्रेमियों की चिंताओं को सुनेगी। उन्होंने नागरिकों, पंचायत प्रतिनिधियों, किसानों और पर्यावरण प्रेमियों से परामर्श में शामिल होकर अपनी बात रखने की अपील की।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली बार समिति के दौरे के दौरान आमजन और पर्यावरण प्रेमियों की बात नहीं सुने जाने की शिकायतें सामने आई थीं। उन्होंने अरावली क्षेत्र की पहाड़ियों के संरक्षण से जुड़े 100 मीटर की परिभाषा पर भी सवाल उठाए। गहलोत के अनुसार, इस परिभाषा से राजस्थान की ज्यादातर पहाड़ियां संरक्षण के दायरे से बाहर हो जातीं। उन्होंने दावा किया कि विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित आदेश पर रोक लगाई थी।
गहलोत ने राज्य सरकार से पर्यावरण संरक्षण के महत्व और आमजन की भावनाओं को समझते हुए अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को सुनिश्चित करने की मांग की।
डीएपी खाद की किल्लत पर सरकार को घेरा
दूसरी पोस्ट में गहलोत ने प्रदेश में डीएपी खाद की कथित कमी को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरसों की बुवाई के महत्वपूर्ण समय में किसान खाद की कमी से परेशान हैं और उन्हें 1,350 रुपये का डीएपी कट्टा कथित तौर पर 2,100 से 2,200 रुपये तक में खरीदना पड़ रहा है।
गहलोत ने कहा कि सहकारी समितियों की ओर से खाद की मांग भेजे जाने के बावजूद पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो रही है। उन्होंने दावा किया कि खाद की किल्लत का मुद्दा सरकार के कैबिनेट मंत्री और विधायक भी मुख्यमंत्री के समक्ष उठा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि सितंबर से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में डीएपी की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने डीएपी के साथ नैनो डीएपी जैसे उत्पाद जबरन दिए जाने की शिकायतों का भी उल्लेख किया।
गहलोत ने सरकार से किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसानों को बुवाई के समय खाद के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़े, तो इसे विकास कैसे कहा जा सकता है?
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

