राजस्थान में अमूल की एंट्री का विरोध, जरूरत पड़ी तो जंतर-मंतर पर करेंगे आंदोलन : अजमेर डेयरी

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राजस्थान में अमूल की एंट्री का विरोध, जरूरत पड़ी तो जंतर-मंतर पर करेंगे आंदोलन : अजमेर डेयरी


अजमेर, 26 जून (हि.स.)। जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (अजमेर डेयरी) की 161वीं संचालक मंडल बैठक में दुग्ध उत्पादकों के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में राजस्थान में मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव के माध्यम से अमूल के संभावित विस्तार का कड़ा विरोध करते हुए स्पष्ट किया गया कि स्थानीय दुग्ध सहकारी व्यवस्था और पशुपालकों के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।

अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने कहा कि राजस्थान में अमूल की एंट्री प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों के हितों से जुड़ा गंभीर विषय है। राज्य में वर्षों से स्थापित सहकारी दुग्ध संरचना को कमजोर करने के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ने पर किसानों के साथ नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन किया जाएगा। साथ ही, यदि राज्य सरकार अथवा संबंधित विभाग अमूल के विस्तार को अनुमति देते हैं तो अजमेर डेयरी कानूनी विकल्पों पर भी विचार करेगी और जरूरत पड़ने पर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी।

चौधरी ने अमूल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन दुग्ध उत्पादों अथवा दूध को स्थानीय दुग्ध सहकारी समितियां गुणवत्ता मानकों के आधार पर स्वीकार नहीं करतीं, उन्हें अमूल द्वारा लिया जाता है। उन्होंने दावा किया कि इससे सहकारी दुग्ध व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। बैठक में अजमेर डेयरी ने अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत बताते हुए गत वित्तीय वर्ष में लगभग 15 करोड़ रुपये के लाभ की जानकारी दी। डेयरी प्रबंधन का कहना है कि पशुपालकों को बेहतर दूध मूल्य उपलब्ध कराने के बावजूद कुशल प्रबंधन के कारण यह उपलब्धि हासिल की गई है।

संचालक मंडल ने पशुपालकों के हित में कई महत्वपूर्ण फैसलों को भी मंजूरी दी। इसके तहत पशुपालकों का बीमा भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के माध्यम से कराने का निर्णय लिया गया, जिसमें प्रीमियम की एक-तिहाई राशि अजमेर डेयरी वहन करेगी। इसके अलावा आगामी सीजन के लिए रिजका (अल्फाल्फा) बीज पर अनुदान, सेक्स सॉर्टेड सीमन की उपलब्धता, पशु आहार आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा दुग्ध उत्पादकों को अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराने संबंधी निर्णय भी लिए गए।

बैठक में राज्य सरकार से मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के लगभग 40 करोड़ रुपये तथा मिड-डे मील योजना के करीब 50 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान की मांग भी की गई। डेयरी प्रबंधन का कहना है कि बकाया राशि मिलने से पशुपालकों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

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