अलवर निकाय चुनाव 2026: टिकट का काउंटडाउन शुरू, 65 वार्डों में सियासी हलचल तेज

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अलवर निकाय चुनाव 2026: टिकट का काउंटडाउन शुरू, 65 वार्डों में सियासी हलचल तेज


अलवर, 26 अगस्त (हि.स.)। नगर निगम अलवर के रण में बिगुल बज चुका है। 65 वार्डों के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों में टिकट का काउंटडाउन शुरू हो गया है। सूत्रों की मानें तो दोनों पार्टियों की पहली लिस्ट किसी भी वक्त जारी हो सकती है, और इसी के साथ शहर की सियासत में भूचाल आना तय है।

टिकट की घोषणा अभी बाकी है, लेकिन जमीन पर जंग शुरू हो चुकी है।

अलवर शहर के 65 वार्डों में इस बार सियासी पारा हाई है। टिकट के लिए कांग्रेस-भाजपा में भगदड़ जैसी स्थिति है। हर वार्ड में 5 से 10 प्रबल दावेदार लाइन में हैं।

स्थिति यह है कि पार्टी ने अभी नाम तय नहीं किया, लेकिन नेता वार्ड में पोस्टर-बैनर और जनसंपर्क में जुट गए हैं। सुबह चाय-पकौड़ी के साथ जनसंपर्क और शाम को अलवर,जयपुर-दिल्ली में बड़े नेताओं के बंगलों पर हाजिरी, यही इन दिनों संभावित प्रत्याशियों का रूटीन बन गया है।

कांग्रेस जहां एक-एक वार्ड में कदम फूंक फूंक कर प्रत्याशी तय करने में जुटी है, तो भाजपा में संगठन और सत्ता का संतुलन साधने की कवायद चल रही है। दोनों पार्टियों के बड़े नेताओं ने अपने-अपने चहेतों के लिए लॉबिंग तेज कर दी है।

इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू मेयर की कुर्सी है। स्थानीय कार्यकर्ता और पदाधिकारी भले ही अपने वार्ड की टिकट के लिए एड़ियां रगड़ रहे हों, लेकिन दोनों पार्टियों के कद्दावर नेताओं की नजर सीधे मेयर की चेयर पर टिकी है।

अंदरखाने मेयर के लिए जोड़-तोड़ का खेल शुरू हो चुका है। कौन बनेगा अलवर का अगला मेयर? किस जातिगत समीकरण को साधा जाएगा? इसको लेकर प्रदेश स्तर पर माथापच्ची जारी है।

दोनों दलों का सबसे बड़ा सिरदर्द टिकट बंटवारे के बाद की बगावत है। हर बार की तरह इस बार भी दर्जनों कार्यकर्ता टिकट कटने से नाराज होकर निर्दलीय ताल ठोकने को तैयार बैठे हैं।

इसी डर से कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अभी से डैमेज कंट्रोल की स्पेशल टीम एक्टिव कर दी है।

भाजपा कांग्रेस की रणनीति क्लियर है

नाराज दावेदारों की लिस्ट तैयार करो।

टिकट घोषणा के 24 घंटे के अंदर मनाओ अभियान शुरू करो।

जो न माने, उसे संगठन से बाहर का रास्ता दिखाओ।

अब देखना यह होगा कि 65 वार्डों की इस महाभारत में किसे मिलेगा टिकट का ताज और किसके हाथ लगेगी बगावत की तलवार। एक बात तय है, अगले 48 घंटे अलवर की नगर निकाय राजनीति के लिए सबसे धमाकेदार होने वाले हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार

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