अक्षय तृतीया पर जयपुर में आस्था—सेवा और शुभ योगों का संगम

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अक्षय तृतीया पर जयपुर में आस्था—सेवा और शुभ योगों का संगम


जयपुर, 19 अप्रैल (हि.स.)। अक्षय तृतीया का पावन पर्व रविवार को राजधानी में श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, जप-तप, दान-पुण्य और विविध धार्मिक आयोजन हुए। श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की, वहीं भगवान परशुराम का जन्मोत्सव भी धूमधाम से मनाया गया।

ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस वर्ष अक्षय तृतीया अत्यंत शुभ रही। गजकेसरी एवं मालव्य योग, उच्च के चंद्रमा, कृतिका नक्षत्र और आयुष्मान योग के संयोग ने दिन को विशेष फलदायी बनाया। बिना मुहूर्त के विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यापार और स्वर्ण क्रय जैसे मांगलिक कार्य बड़ी संख्या में हुए, जिससे बाजारों में भी दिनभर रौनक रही।

आमेर रोड स्थित बद्रीनारायण जी मंदिर डूंगरी जयपुर में भव्य मेला भरा, जहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। भगवान का पंचामृत अभिषेक कर नवीन पोशाक धारण करवाई गई और पुष्पों से आकर्षक झांकियां सजाई गईं। श्रद्धालुओं ने गर्मी से राहत देने के लिए ‘बिजणी’ से हवा कर सेवा की तथा आम, तरबूज, खरबूजा और मिश्री का भोग लगाया गया।

इधर जैन समाज ने भी अक्षय तृतीया को भगवान आदिनाथ के प्रथम पारणा दिवस के रूप में मनाया। शहर के 100 से अधिक दिगम्बर जैन मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा और पूजा-अर्चना के साथ विशेष आयोजन हुए। मंदिरों के बाहर हजारों श्रद्धालुओं को इक्षु रस पिलाया गया तथा रात्रि में भक्तामर स्तोत्र, दीप महाअर्चना और भक्ति कार्यक्रम आयोजित किए गए।

विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों ने अन्न, जल व वस्त्र वितरण जैसे सेवा कार्य भी किए। पूरे दिन शहर में आस्था, सेवा और सामाजिक समरसता का वातावरण बना रहा, जिससे यह पर्व श्रद्धा और सद्भाव का संदेश देता हुआ सम्पन्न हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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