हजारेश्वर महादेव का सूर्य की पहली किरण से हुआ अभिषेक, ऊर्जा से परिपूर्ण क्षण

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हजारेश्वर महादेव का सूर्य की पहली किरण से हुआ अभिषेक, ऊर्जा से परिपूर्ण क्षण


चित्तौड़गढ़, 20 मार्च (हि.स.)। आस्था, विज्ञान और अद्भुत वास्तुकला का संगम कहे जाने वाले पावटा चौक स्थित श्री हजारेश्वर महादेव मंदिर में इन दिनों एक अलौकिक दृश्य श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर रहा है। यहां वर्ष में दो बार ऐसा दिव्य संयोग बनता है, जब सूर्योदय की पहली किरण सीधे गर्भगृह में विराजित शिवलिंग पर पड़ती है और मानो स्वयं सूर्यदेव भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं।

मंदिर के श्री महंत चंद्रभारती महाराज के अनुसार यह क्षण अत्यंत शुभ और ऊर्जा से परिपूर्ण माना जाता है। सनातन धर्म में सूर्य को ऊर्जा का स्रोत और ग्रहों का राजा माना गया है। ऐसे में जब सूर्य की प्रथम किरण भगवान शिव का अभिषेक करती है, तो यह दृश्य भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभूति का अद्भुत अवसर बन जाता है। मंदिर की विशेष वास्तु कला इस दिव्य घटना का मूल आधार है। भोर की पहली किरण वेधशाला मंडप और गर्भगृह के छोटे से द्वार को चीरते हुए सीधे शिवलिंग पर आकर पड़ती है। ऐसा प्रतीत होता है मानो सूर्यदेव स्वयं भोलेनाथ को प्रणाम कर संसार में प्रकाश फैलाने की अनुमति मांग रहे हो। आचार्य श्रवण सामवेदी बताते हैं कि इस मंदिर का निर्माण पुष्य नक्षत्र में किया गया था, जो इसे और भी विशेष बनाता है। मंदिर की संरचना इतनी अद्भुत है कि इसके गुंबद के पास निर्माणकर्ता की आकृति भी दिखाई देने की मान्यता है, जो इसकी शिल्पकला की उत्कृष्टता को दर्शाती है।

महाशिवरात्रि जैसे पावन अवसरों पर यहां लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भक्तों का मानना है कि यहां दर्शन और अभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि भगवान शिव को ‘भाव के भूखे’ कहा जाता है। जलाभिषेक, रुद्राभिषेक के साथ-साथ सूर्य किरणों द्वारा होने वाला यह प्राकृतिक अभिषेक भक्तों के लिए विशेष आस्था और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक बन गया है। हजारेश्वर महादेव मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय वास्तुकला और वैज्ञानिक सोच का भी एक अनुपम उदाहरण है जहां आस्था और प्रकृति का अद्भुत मिलन देखने को मिलता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अखिल

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