धान और प्याज के व्यापारियों को रेलवे की सौगात, अब कम देना होगा रेल भाड़ा
काेटा, 26 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय रेलवे ने धान और प्याज का कारोबार करने वाले व्यापारियों, राइस मिल संचालकों तथा अन्य माल लदानकर्ताओं को आर्थिक लाभ देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। रेलवे बोर्ड ने धान और प्याज की रेल ढुलाई में भाड़े की गणना के लिए निर्धारित न्यूनतम वजन कम कर दिया है। इससे व्यापारियों को पहले की तुलना में कम रेल भाड़ा देना होगा। नई व्यवस्था 28 अक्टूबर 2026 से लागू होगी|
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि रेलवे बोर्ड के निर्णय के अनुसार धान की ढुलाई के लिए संबंधित वैगनों का न्यूनतम भाड़ा गणना वजन अब 52 टन तथा प्याज के लिए 45 टन निर्धारित किया गया है। पहले विभिन्न श्रेणी के वैगनों एवं रेल मार्गों के अनुसार धान के लिए यह सीमा 61.4 टन से 64 टन तक थी।
धान और प्याज ऐसी कृषि उपज हैं, जो वजन में अपेक्षाकृत हल्की होने के बावजूद वैगन में अधिक जगह घेरती हैं। ऐसे में कई बार वैगन पूरा भर जाता है, लेकिन माल का वास्तविक वजन रेलवे द्वारा भाड़े की गणना के लिए निर्धारित न्यूनतम वजन तक नहीं पहुंच पाता। इसके बावजूद व्यापारियों को निर्धारित न्यूनतम वजन के अनुसार भाड़ा देना पड़ता था।
उदाहरण के लिए, पहले यदि कोई व्यापारी एक वैगन में 52 टन धान भरता था, तो 64 टन की निर्धारित सीमा लागू होने पर उसे 64 टन के हिसाब से रेल भाड़ा देना पड़ता था। यानी बिना लदे 12 टन अतिरिक्त वजन का भाड़ा भी देना पड़ता था। अब रेलवे ने यह सीमा घटाकर 52 टन कर दी है। इससे व्यापारी को 64 टन के बजाय 52 टन के हिसाब से भाड़ा देना होगा और 12 टन के अतिरिक्त भाड़े की बचत होगी।
रेलवे बोर्ड ने यह व्यवस्था निर्धारित श्रेणी के वैगनों के लिए लागू की है। इनमें सभी निर्धारित रेल मार्ग श्रेणियों पर धान के लिए 52 टन तथा प्याज के लिए 45 टन की अनुमेय वहन क्षमता (PCC) निर्धारित की गई है।
रेलवे के इस निर्णय से धान और प्याज के व्यापारियों, राइस मिल संचालकों तथा कृषि उपज का परिवहन करने वाली एजेंसियों की माल ढुलाई लागत कम होगी। इससे कृषि उत्पादों का रेल परिवहन अधिक किफायती बनेगा तथा व्यापारियों को रेलवे के माध्यम से माल परिवहन के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

