पेपर लीक पर बहस के दौरान विधानसभा में हंगामा, कटारिया-धारीवाल में नोकझोंक

पेपर लीक पर बहस के दौरान विधानसभा में हंगामा, कटारिया-धारीवाल में नोकझोंक


पेपर लीक पर बहस के दौरान विधानसभा में हंगामा, कटारिया-धारीवाल में नोकझोंक


जयपुर, 24 जनवरी (हि.स.)। राज्य विधानसभा में पेपर लीक पर बहस के दौरान मंगलवार को खूब हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने पेपर लीक से जुड़े मामले में शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला के जवाब पर सवाल उठाते हुए इसके विरोध में बायकॉट करने की घोषणा की। इस पर संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि पहले पूरा जवाब सुनकर जाइए। धारीवाल के टोकने पर कटारिया नाराज हो गए और कहा कि क्या जवाब सुन लें। इसके बाद कटारिया और धारीवाल के बीच नोक-झोंक हो गई। भाजपा विधायकों ने भी हंगामा शुरू कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने हंगामा बढ़ते देख पेपर लीक पर बहस को खत्म कर दिया और एक बजकर 57 मिनट पर 10 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया।

सदन की दोबारा कार्यवाही शुरू होने के बाद पेपर लीक पर बहस शुरू हुई। विधानसभा अध्यक्ष जोशी ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दिन स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा नहीं होती, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए परंपरा तोड़कर पेपर लीक के स्थगन पर चर्चा की मंजूरी दी है। हमें भर्ती प्रक्रिया से परीक्षाओं के पैटर्न पर चर्चा की जरूरत है। इससे पहले विद्या संबल योजना में सरकारी स्कूलों में गेस्ट फैकल्टी पर टीचर लगाने की योजना पर शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला सदन में घिर गए।

नेता प्रतिपक्ष ने सबसे पहले स्कूलों में खाली पड़े पद का मुद्दा उठाते कहा कि इतने समय से पद खाली पड़े हैं। बच्चों को कौन पढ़ाएगा? इस पर मंत्री ने तर्क दिया कि आरक्षण का प्रावधान करने के लिए कुछ समय के लिए योजना स्थगित की है। इस बीच, सीपी जोशी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि शिक्षकों के खाली पदों को गेस्ट फैकल्टी से भरने की योजना सिरे नहीं चढ़ी। आप संविदा पर करना चाहते हैं या केवल गेस्ट फैकल्टी पर। सालभर तक विद्या संबल योजना में पद नहीं भरने से बच्चों की पढ़ाई नहीं हो रही है। इसकी व्यवस्था करें। इस पर शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला ने कहा कि अब आगे से स्कूल प्रिंसिपल के स्तर पर गेस्ट फैकल्टी लगाए जा सकेंगे। प्रिंसिपल को इसका अधिकार दिया जाएगा।'

विधानसभा में शिक्षा मंत्री कल्ला ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 16 (2) अनुसार निवास स्थान के आधार पर सार्वजनिक नियोजन में भेदभाव नहीं किया जा सकता। निवास स्थान के आधार पर सरकारी नौकरी में कानूनी प्रावधान करने का अधिकार अनुच्छेद 16 (3) अनुसार केवल संसद को है। वर्तमान में प्रदेश की भर्तियों में स्थानीय प्रदेशवासियों के लिए अलग से आरक्षण का प्रावधान नहीं है। आरक्षित वर्गों एससी, एसटी, ओबीसी, एमबीसी और ईडब्ल्यूएस की कुल भर्तियों में सें 64 प्रतिशत पदों पर केवल राजस्थान के स्थानीय निवासियों से भरे जाने का प्रावधान है। इसके अलावा भूतपूर्व सैनिकों के पद भी स्थानीय निवासियों से भरे जाने का प्रावधान है।

हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/ ईश्वर

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