‘प्रभात ग्राम’ कार्यशाला का समापन, 30 गांवों से 205 कार्यकर्ताओं ने लिया भाग
प्रतपागढ़, 21 सितंबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चित्तौड़ प्रांत की ओर से बसेरा में आयोजित तीन दिवसीय प्रांत स्तरीय ‘प्रभात ग्राम’ कार्यशाला का समापन हुआ। समापन सत्र को संबोधित करते हुए संघ के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार ने गांवों के विकास के लिए आधुनिक तकनीक, श्रम, जैविक खेती और सामाजिक सहभागिता के समन्वय पर जोर दिया।
आलोक कुमार ने कहा कि नई पीढ़ी की रुचि और प्रकृति को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण विकास की योजनाओं का नियोजन किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी अच्छे कार्य की शुरुआत में विरोध और कठिनाइयां आती हैं, लेकिन निरंतर प्रयास से इन बाधाओं को पार कर सफलता हासिल की जा सकती है। समाज में स्थायी परिवर्तन के लिए क्रमिक रूप से कार्य करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि गांवों को विकसित करने के लिए आधुनिक तकनीक और श्रम का बेहतर समन्वय जरूरी है। गांव के तकनीकी विशेषज्ञों को सम्मान और अवसर मिलना चाहिए। ग्राम विकास समितियों को सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि पात्र लोगों को उनका लाभ दिलाया जा सके। दिव्यांगों, वृद्धों और अन्य जरूरतमंदों को योजनाओं से जोड़ने में ग्राम विकास समितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
आलोक कुमार ने ग्राम विकास समितियों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिन कार्यों में महिलाओं की सहभागिता होती है, वे अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ते हैं। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ग्रामीण विकास को नई गति दे सकती है।
किसानों से जैविक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत परिवार से ही होनी चाहिए। रासायनिक प्रयोगों को धीरे-धीरे कम करते हुए गैर-रासायनिक एवं जैविक खेती की दिशा में कदम बढ़ाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पहले आत्मनिर्भर थी और गांवों में ही अनेक आवश्यक वस्तुओं का निर्माण होता था। वर्तमान समय में आवश्यकता पुराने दौर में लौटने की नहीं, बल्कि आधुनिक सुविधाओं से युक्त, आत्मनिर्भर और सक्षम गांवों के निर्माण की है।
कार्यशाला में बताया गया कि ‘प्रभात ग्राम’ योजना के तहत गांवों में सामाजिक शिक्षा एवं संस्कार, सामाजिक स्वास्थ्य, सामाजिक समरसता, सामाजिक स्वावलंबन, सामाजिक सुरक्षा, गौ आधारित जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण सहित सात आयामों पर लगातार कार्य किया जाता है। इनमें से कम से कम चार आयामों पर प्रभावी कार्य के बाद प्रांत टोली के निरंतर अवलोकन के आधार पर गांव को ‘प्रभात ग्राम’ घोषित किया जाता है।
तीन दिवसीय कार्यशाला में 30 प्रभात ग्रामों से 205 कार्यकर्ता शामिल हुए।
कार्यकर्ताओं का निवास भी गांवों के परिवारों के बीच रखा गया, जिससे ग्रामीण जीवन और ग्राम विकास की गतिविधियों को निकटता से समझने का अवसर मिला।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

