समय के साथ अखबारों और साहित्य पर बढ़ा बाजार का दबाव: सिंदल

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समय के साथ अखबारों और साहित्य पर बढ़ा बाजार का दबाव: सिंदल


हिन्दी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष पूर्ण होने पर जार की विचार गोष्ठी आयोजित

जोधपुर, 30 मई (हि.स.)। जब-जब राजनीति लडखड़़ाई, साहित्य ने उसे संभाला। यह विचार मुख्य वक्ता राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गीतकार दिनेश सिंदल ने हिन्दी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (जार) की जोधपुर इकाई द्वारा मदन-सावित्री डागा स्मृति भवन, नेहरू पार्क में हिन्दी पत्रकारिता में साहित्य का योगदान विषय पर आयोजित गोष्ठी में व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता और साहित्य एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब राजनीति लडखड़़ाती है तो साहित्य उसे संभालने का कार्य करता है। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता दिनेश सिंदल, अयोध्याप्रसाद गौड़ व वरिष्ठ साहित्यकार सत्येन व्यास रहे। जबकि स्वागत भाषण जार के जिलाध्यक्ष सैय्यद मुनव्वर अली ने दिया। सिंदल ने कहा कि अखबार समाज सुधार का कार्य करते हैं और जनमत निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर वर्तमान समय तक अनेक सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन पत्रकारिता के माध्यम से संभव हुए हैं।

उन्होंने कहा कि समय के साथ अखबारों और साहित्य पर बाजार का दबाव बढ़ा है, जिसके चलते विज्ञापन प्रमुख और समाचार गौण होते गए हैं। विशिष्ट अतिथि अयोध्याप्रसाद गौड़ ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता का दो सौ वर्ष पूर्व उदित हुआ सूरज आज भी लोकतंत्र को प्रकाशमान कर रहा है। समाचारों में भाषा का सौंदर्य और विचारों की अभिव्यक्ति हिन्दी पत्रकारिता की पहचान रही है।

वर्तमान समय में सिटीजन जर्नलिज्म को बढ़ावा मिला है तथा कोविड काल के बाद इसे और गति मिली है। भाषाई कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दौर में पत्रकारिता के सामने नई चुनौतियां हैं, लेकिन हिन्दी पत्रकारिता निरंतर प्रगति कर रही है।

गोष्ठी में जार के अध्यक्ष अली ने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, गणेश शंकर विद्यार्थी, राजेन्द्र माथुर, श्रीकांत वर्मा सहित अनेक पत्रकार-साहित्यकारों के योगदान को याद किया। साथ ही जोधपुर की पत्रकारिता में शेर-ए-राजस्थान जयनारायण व्यास, नेमीचंद जैन भावुक, उमराव बोहरा, गणेशीलाल व्यास, रमेश पारीक, मानक मोटमणि और दिनेश जोशी सहित अनेक हस्तियों के योगदान का भी स्मरण किया गया।

कार्यक्रम में कवि व आलोचक प्रो. कौशलनाथ उपाध्याय, कहानीकार हरिप्रकाश राठी, महेश खेतानी, केडी इसरानी, राजेश शर्मा, गोपालसिंह राठौड़, रामजी व्यास, मनोज बोहरा, मुकेश श्रीमाली, प्रमोद वैष्णव, अरुण माथुर, चेतन चौहान, छगन राव, दीपा परिहार, नीलम व्यास, यश पारीक, लालजी प्रजापत, कालूराम कारवाल, हरीश देवनानी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सत्येन व्यास ने किया। अंत में मनोज बोहरा ने आभार व्यक्त किया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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