विश्वमांगल्य सभा का प्रांतीय अधिवेशन आयोजित, ‘मातृत्व संस्कार समागम’ में युगानुकूल मातृत्व पर हुआ मंथन

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विश्वमांगल्य सभा का प्रांतीय अधिवेशन आयोजित, ‘मातृत्व संस्कार समागम’ में युगानुकूल मातृत्व पर हुआ मंथन


विश्वमांगल्य सभा का प्रांतीय अधिवेशन आयोजित, ‘मातृत्व संस्कार समागम’ में युगानुकूल मातृत्व पर हुआ मंथन


विश्वमांगल्य सभा का प्रांतीय अधिवेशन आयोजित, ‘मातृत्व संस्कार समागम’ में युगानुकूल मातृत्व पर हुआ मंथन


जयपुर, 03 मई (हि.स.)। विश्वमांगल्य सभा प्रांत जयपुर द्वारा रविवार को इंदिरा गांधी पंचायतराज एंड रूरल डपलपमेंट इंस्टीटयूट में प्रांतीय अधिवेशन ‘‘मातृत्व संस्कार समागम - परम्परा, प्रगति एवं परिपक्वता का संगम’’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मातृत्व की भूमिका, परिवार निर्माण और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की केंद्रीय भागीदारी पर व्यापक चिंतन किया गया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राज्य मंत्री मंजू बाघमार रहीं, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में जयपुर शहर सांसद मंजू शर्मा उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा महिला मोर्चा राजस्थान प्रदेशाध्यक्ष राखी राठौड़ ने की। साथ ही विश्वमांगल्य सभा की राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. वृषाली जोशी तथा राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका शुक्ला ने भी अधिवेशन को संबोधित किया।

विश्वमांगल्य सभा जयपुर प्रांत की अध्यक्ष सुनीता राजोरिया ने बताया कि विश्वमांगल्य सभा एक राष्ट्रव्यापी संगठन है, जिसकी स्थापना 19 जनवरी 2010 को नागपुर में आचार्य जितेन्द्र नाथ की प्रेरणा से हुई थी। संगठन का उद्देश्य प्रत्येक परिवार की मातृशक्ति को केंद्र में रखते हुए संस्कारित, सक्षम और नैतिक समाज का निर्माण करना है।

अधिवेशन का मुख्य विषय ‘‘युगानुकूल मातृत्व पर चिंतन’’ रहा। राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. वृषाली जोशी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि संगठन के कार्य का मूल केंद्र ‘माँ’ है।

उन्होंने माँ जीजाबाई, सारदा देवी, रानी लक्ष्मीबाई और पन्नाधाय जैसी महान मातृशक्तियों के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि मातृत्व केवल परिवार तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।

उन्होंने बताया कि विश्वमांगल्य सभा मातृशक्ति के चार प्रमुख स्तंभ संस्कार, सामर्थ्य, सेवा और सदाचार पर विशेष रूप से कार्य कर रही है। संगठन का लक्ष्य प्रत्येक घर में ऐसी माताओं का निर्माण करना है, जो अपने परिवार को नैतिक मूल्यों, संस्कारों और दूरदर्शिता से नेतृत्व प्रदान कर सकें।

कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों जैसे ज्ञान, कला, उद्यम, सेवा, शक्ति, मातृत्व और धर्म में उल्लेखनीय योगदान देने वाली सात विशिष्ट माताओं का सम्मान भी किया गया। इस सम्मान समारोह ने कार्यक्रम को प्रेरणा और सामाजिक जागरूकता का विशेष आयाम प्रदान किया।

अधिवेशन में बड़ी संख्या में महिला प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों की भागीदारी रही। कार्यक्रम ने मातृत्व की बदलती भूमिका को आधुनिक संदर्भों में परिभाषित करते हुए परंपरा और प्रगति के संतुलन का संदेश दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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