मंदिरों एवं घरों में विधि-विधान से होगी घट स्थापना
जयपुर, 18 मार्च (हि.स.)। शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्र अमावस्या युक्त प्रतिपदा गुरुवार से आरंभ होगा। नवरात्र के प्रथम दिन मंदिरों एवं घरों में विधि-विधान से घट स्थापना कर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाएगी। मंदिरों में माता रानी को विशेष चुनरी ओढ़ाकर पुष्पों से भव्य श्रृंगार किया जाएगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा के अनुसार घट स्थापना का सर्वश्रेष्ठ अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:11 बजे से 12: 58 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त प्रात: चौघडिय़ा मुहूर्त सुबह 6:54 बजे से 8:06 बजे तक तथा सुबह 11:05 बजे से दोपहर 3:34 बजे तक भी घट स्थापना की जा सकेगी। इस वर्ष मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर आएंगी, जो सुख-समृद्धि का प्रतीक माना गया है।
आमेर स्थित शिला माता मंदिर में प्रथम नवरात्र को सुबह 7:05 बजे घट स्थापना होगी तथा श्रद्धालुओं के लिए दर्शन सुबह 8:15 बजे से प्रारंभ होंगे। मंदिर में प्रतिदिन दर्शन का समय प्रात: 6 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक एवं सायं 4 बजे से रात 8:30 बजे तक रहेगा। दोपहर 12:30 से 4 बजे तक मंदिर के पट बंद रहेंगे।
नवरात्र के दौरान आमेर महल में 18 से 28 मार्च तक हाथी सवारी अस्थायी रूप से बंद रहेगी। साथ ही प्रतिदिन शाम 5:30 बजे के बाद पर्यटकों का प्रवेश भी प्रतिबंधित रहेगा तथा रात्रिकालीन पर्यटन गतिविधियों पर रोक रहेगी। प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त पुलिस बल, होमगार्ड एवं सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था की गई है।
दुर्गापुरा स्थित प्राचीन दुर्गा माता मंदिर में महंत महेन्द्र भट्टाचार्य के सान्निध्य में प्रात: 7 बजे मंगल घट स्थापना होगी। नवरात्र के दौरान दुर्गा सप्तशती पाठ एवं अखंड ज्योति के दर्शन होंगे। मंदिर के पट प्रात: 6 से 12 बजे तक तथा सायं 5 से रात 9 बजे तक खुले रहेंगे।
श्री दक्षिणमुखी बालाजी हाथोज धाम में स्वामी बालमुकुंदाचार्य महाराज के सान्निध्य में 19 मार्च से बसंत नवरात्र महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। प्रथम दिन प्रात: 7:15 बजे घट स्थापना के साथ मंडल देवताओं का पूजन होगा। नवरात्र के दौरान प्रतिदिन वाल्मीकि सुंदरकांड, दुर्गा सप्तशती पाठ, बगलामुखी मंत्र अनुष्ठान एवं दशांश यज्ञ संपन्न होंगे। रामनवमी के दिन महाआरती एवं कन्या पूजन के साथ महोत्सव का समापन किया जाएगा।
सूरजपोल स्थित रुद्रघंटेश्वरी महाकालिका मंदिर में दोपहर 12:15 बजे घट स्थापना की जाएगी। इस अवसर पर माता का अलौकिक श्रृंगार कर भगवान शिव के 108 रुद्र नामों से युक्त 108 रुद्र घंटिकाओं की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
श्री खोले के हनुमान मंदिर में गुरुवार को चैत्र नवरात्रा के प्रथम दिन घट स्थापना प्रात: 10 बजे की जाएगी। नौ दिवसीय नवरात्रा के दौरान लक्ष्मण डूंगरी का खोल रामचरित मानस की चौपाईयों से गूंजायमान रहेगा।
श्री नरवर आश्रम सेवा समिति के अध्यक्ष गिरधारी लाल शर्मा ने बताया कि प्रात: 8 बजे बास बदनपुरा स्थित मुरली मनोहर मंदिर से 200 महिलाएं कलश लेकर श्री खोले के हनुमान मंदिर पहुंचेगी। कलश यात्रा के बाद वाल्मीकी रामायण की पूजा के बाद घट स्थापना की जाएगी। घट स्थापना के साथ ही रामायण का पारायण प्रारंभ होगा। अपराह्न तीन बजे नवाह्न रामायण की पूजा और संध्या में 6.30 बजे 125 आसन से रामचरित मानस के संगीतमय सामूहिक पाठ किए जाएंगे।
हिंदू नववर्ष नवसंवत्सर 2083 और नवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर त्रिपोलिया बाजार स्थित शिव शक्ति हनुमान मंदिर, तवर जी का नोहरा में विविध धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ किया जाएगा।
मंदिर समिति के अध्यक्ष पं. तरुण भारती ने जानकारी देते हुए बताया कि नवसंवत्सर का शुभारंभ प्रात: सूर्योदय के समय घंटे-घडिय़ालों की मंगल ध्वनि के साथ किया जाएगा। इस अवसर पर दुर्गा माता का पंचामृत अभिषेक कर विधि-विधान से घट स्थापना की जाएगी। प. दिनेश शर्मा के आचार्यत्व में पूरे नौ दिनों तक दुर्गापाठ एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में भक्तों के लिए विशेष पूजा-अर्चना एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
मंदिर समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है।
ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि धार्मिक ग्रंथ धर्मसिंधु में उल्लेख मिलता है कि तत्रौदयिकी प्रतिपद् ग्राह्या। दिनद्विये उदयव्याप्तौ अव्याप्तौ वा पूर्वा। अर्थात् यदि प्रतिपदा दोनों दिनों में उदय व्यापिनी न हो, तो पूर्व दिवस से ही नवरात्र आरंभ किया जाना चाहिए।
इसलिए 2026 में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का क्षय हो रहा है। प्रतिपदा तिथि 19 मार्च, गुरुवार को सूर्योदय के बाद प्रारंभ होकर उसी दिन अगले दिन के सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी, जिससे यह तिथि 19 एवं 20 मार्च—दोनों ही दिनों में उदय व्यापिनी नहीं रहेगी। इस स्थिति में शास्त्रीय मान्यता के अनुसार बसंत नवरात्रा का शुभारंभ चैत्र कृष्ण अमावस्या, 19 मार्च, गुरुवार को प्रात: 6:53 बजे के बाद किया जाना श्रेष्ठ रहेगा। घट स्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। 19 मार्च को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:11 बजे से 12:58 बजे तक रहेगा, जिसमें देवी आवाहन एवं घट स्थापना करना विशेष फलदायी रहेगा।
इसके अतिरिक्त, जो श्रद्धालु अन्य समय में स्थापना करना चाहते हैं, वे प्रात: 6:54 बजे से 8:06 बजे तक शुभ चौघडिय़े के उत्तरार्ध में तथा दिन में 11:05 बजे से दोपहर 3:34 बजे तक चर, लाभ एवं अमृत चौघडिय़ों में भी घट स्थापना कर सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

