भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा अक्षय तृतीया का पर्व

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भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा अक्षय तृतीया का पर्व


जयपुर, 18 अप्रैल (हि.स.)। अक्षय तृतीया पर्व 19 अप्रैल, रविवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। सनातन धर्म में इस तिथि को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है, क्योंकि ‘अक्षय’ का अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो। मान्यता है कि इस दिन किए गए सभी शुभ कार्य, दान-पुण्य, जप-तप और पूजा का फल अनंत गुना बढक़र प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा के अनुसार धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ से ही भगवान विष्णु ने विभिन्न अवतार लेकर धर्म की स्थापना की। इसी क्रम में उनका छठा अवतार भगवान परशुराम के रूप में हुआ, जिन्होंने पृथ्वी से अधर्म का नाश कर सज्जनों की रक्षा की। इस कारण अक्षय तृतीया को परशुराम जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है और इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

इस वर्ष अक्षय तृतीया पर गजकेसरी और मालव्य जैसे अत्यंत शुभ योग बन रहे हैं। गजकेसरी योग चंद्रमा और देवगुरु बृहस्पति के संयोग से बनता है, जो यश, बुद्धि और उन्नति का कारक माना जाता है। वहीं मालव्य योग शुक्र ग्रह के अपनी राशि वृषभ में स्थित होने से बनता है, जो धन, ऐश्वर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं का प्रतीक है। उच्च के चंद्रमा, कृतिका नक्षत्र, आयुष्मान योग भी अत्यंत शुभ है। ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को मां लक्ष्मी से भी जोड़ा जाता है, इसलिए इस दिन धन और समृद्धि के विशेष योग बनते हैं।

इस दिन बिना मुहूर्त देखे भी मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार आरंभ या सोना खरीदना—सभी कार्य इस दिन शुभ माने जाते हैं। अक्षय तृतीया पर विशेष रूप से दान-पुण्य करने से पापों का क्षय और पुण्य की वृद्धि होती है। वर्ष में कुछ ही तिथियां ऐसी होती हैं जो समस्त अशुभ प्रभावों से मुक्त मानी जाती हैं और अक्षय तृतीया उनमें से एक है।

खरीदारी के लिए सुबह 10 से 11:45 बजे तक अभिजीत मुहूर्त और शाम 5:15 से 7:15 बजे तक का समय विशेष शुभ रहेगा। हालांकि यह दिन स्वयं ही अक्षय फल देने वाला माना जाता है, इसलिए पूरे दिन किसी भी समय शुभ कार्य किए जा सकते हैं। पूजा विधि के अंतर्गत भगवान कृष्ण के चरणों के दर्शन और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा का विशेष महत्व है।

आखातीज पर रविवार को दान दान-पुण्य, पूजा-अर्चना और मांगलिक कार्यों की धूम रहेगी। आखातीज का पर्व सुख, समृद्धि और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि से सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था, इसलिए इसे कृतयुगादि तृतीया भी कहा जाता है। इस दिन किए गए दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों का फल अक्षय माना जाता है। श्रद्धालु विशेष रूप से सूर्य देवता की पूजा कर उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं।

आखातीज के अबूझ सावे पर जिलेभर में 2000 से अधिक विवाह होंगे। इनमें सामूहिक विवाह सम्मेलन भी शामिल हैं। मंदिरों और घरों में मांगलिक कार्यक्रम, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान भी इस दिन मौसम के शकुन देखकर आगामी फसल के लिए संकेत लेते हैं।

ज्योतिषाचार्य पं.बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि अक्षय तृतीया को किए गए दान और खरीदारी का फल अनंत और शाश्वत माना गया है। अक्षय तृतीया को सोना खरीदना शुभ रहता है। सोना नहीं खरीद सकते तो जौ खरीदे। इसे सोने के बराबर माना जाता है। दक्षिणावर्ती शंख, वाहन, जमीन-जायदाद, पीली कौड़ी, मिट्टी का घड़ा खरीदना शुभ माना जाता है। जल से भरे घड़े, हाथ के पंखे, खडा़ऊ, छाता, खरबूजा, ककड़ी,चीनी,सत्तू,वस्त्र,गोदान का दान करने से पितरों की तृप्ति होकर जीवन के कष्ट दूर होते है। आखातीज पर जल, अन्न, वस्त्र और धन का दान विशेष फलदायी माना गया है। इस दिन जरूरतमंदों की सहायता, गौसेवा, अन्नदान और धार्मिक कार्य करने से जीवन में सुख-समृद्धि बढऩे की मान्यता है। समाज में इसे शुभता, शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक पर्व माना जाता है।

रविवार को अक्षय तृतीया के अबूझ सावे पर बंपर विवाह होंगे। चातुर्मास से पूर्व लगभग 30 से अधिक विवाह के शुभ मुहूर्त हैं। ज्योतिषाचार्य पं. सुरेन्द्र गौड़ के अनुसार, इस सीजन का सबसे प्रमुख और अबूझ सावा 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन रहेगा, जिसे विवाह के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त अप्रैल, मई, जून और जुलाई माह में भी विभिन्न तिथियों पर विवाह के शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं, जिससे लगातार चार महीनों तक शादी समारोह आयोजित होंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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