बागवानी फसलों को व्यावसायिक रूप में अपनाने पर ज़ोर : राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ
बीकानेर, 26 फ़रवरी (हि.स.)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के अंतर्गत केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान में 26 से 28 फरवरी तीन दिवसीय शुष्क बागवानी पर ''जैव-विविधता और जलवायु अनुकूलनशीलता द्वारा टिकाऊ भविष्य का सृजन'' विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप-महानिदेशक (बागवानी), डॉ. एस.के. सिंह ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान की विषम परिस्थितियों में भी किसान बागवानी फसलों की उन्नत तकनीक अपनाकर शुष्क क्षेत्रीय बागवानी फसलों (फल एवं सब्जियों) से उत्पादन बढ़ा सकते है। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान बागवानी फसलों के अलावा औषधीय एवं मसाला फसलों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होने बागवानी फसलों को व्यावसायिक रूप में अपनाने पर ज़ोर दिया एवं सीड विलेज कांसेप्ट, क्लीन प्लांट प्रोग्राम, कृषि रोड मैप एवं विकसित कृषि अभियान कार्यक्रम पर विस्तार से बताया।
इससे पूर्व कार्यक्रम के शुभारंभ में केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान निदेशक डॉ. जगदीश राणे ने मेहमानों एवं गणमान्य लोगों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में विस्तार बताया। उन्होंने बताया कि यह राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर एवं भारतीय शुष्क बागवानी समिति के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक डॉ. वी.बी. पटेल, ने बागवानी फसलों विशेषकर काचरी, काकड़िया, खजूर, खेजड़ी एवं अन्य फसलों के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि किसान उन्नत तकनीकियाँ अपना कर अच्छा लाभ ले सकते है। इस कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के विशिष्ट अधिकारी डॉ प्रदीप कुमार के राष्ट्रीय बागवानी मिशन द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं विशेषकर पोली हाउस एवं क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्रम के बारे में विस्तार पूर्वक बताया।
नाबार्ड एजीएम.रमेश तांबिया ने नाबार्ड द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, स्टार्ट-अप, एवं क्लस्टर प्रोजेक्ट पर विस्तार से बताया। कार्यक्रम के दौरान संस्थान के भूतपूर्व निदेशक डॉ. पी. एल. सरोज ने संस्थान द्वारा विकसित शुष्क क्षेत्रों के फल एवं सब्जियों की तीन दशक की यात्रा के दौरान विकसित उन्नत फल एवं सब्जियों की तकनीक के बारे में विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में आयोजन सचिव डॉ. एम.के. जाटव एवं डॉ. ए.के. सिंह ने इस तीन दिवसीय विभिन्न सत्रों की रूपरेखा के बारे में बताया एवं सभी मेहमानों एवं आगंतुकों को आभार एवं धन्यवाद जताया।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

