पुष्कर बनेगा राष्ट्रीय आध्यात्मिक चेतना का केंद्र

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पुष्कर बनेगा राष्ट्रीय आध्यात्मिक चेतना का केंद्र


पुष्कर बनेगा राष्ट्रीय आध्यात्मिक चेतना का केंद्र


पुष्कर बनेगा राष्ट्रीय आध्यात्मिक चेतना का केंद्र


जयपुर, 27 फ़रवरी (हि.स.)। पुष्कर की पावन धरा एक बार फिर ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन की साक्षी बनने जा रही है। आठ मार्च से 19 अप्रैल तक यहां 43 दिवसीय शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ का भव्य आयोजन होगा। आयोजकों का दावा है कि सतयुग में महर्षि विश्वामित्र द्वारा सम्पन्न महायज्ञ के बाद कलयुग में इस स्वरूप का यह प्रथम महाअनुष्ठान है, जो महामंडलेश्वर स्वामी प्रखर महाराज के सान्निध्य में सम्पन्न होगा।

स्वामी प्रखर महाराज का कहना है कि वर्तमान समय में विश्व में व्याप्त आतंक, भय, असंतुलन और सांस्कृतिक संकटों के शमन के लिए सामूहिक आध्यात्मिक ऊर्जा का जागरण आवश्यक है। उनके अनुसार इस महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद सकारात्मक परिवर्तन की नई शुरुआत होगी और पुष्कर पुनः राष्ट्रीय आध्यात्मिक चेतना के केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित होगा।

महायज्ञ का शुभारंभ आठ मार्च को अपराह्न चार बजे शोभायात्रा से होगा। ब्रह्म घाट से सैकड़ों महिलाएं जल कलश लेकर पुष्कर के मुख्य बाजार से होते हुए यज्ञस्थल तक पहुंचेंगी। शंखध्वनि, वैदिक मंत्रोच्चार और मंगलगीतों से पूरा नगर आध्यात्मिक वातावरण में डूब जाएगा। खेरकड़ी रोड स्थित लगभग 80 से 100 बीघा क्षेत्र में “गायत्री शक्ति पीठ, मणिवेदिका पीठ” नाम से भव्य यज्ञनगरी तैयार की गई है, जहां चार माह से तैयारियां चल रही थीं।

इस महाअनुष्ठान में 2000 विद्वान पंडित 24 करोड़ गायत्री मंत्रों का जप करेंगे। साथ ही दो करोड़ 40 लाख दशांश और 60 लाख सूर्यसूक्त आहुतियों सहित लगभग 3 करोड़ आहुतियों का संकल्प लिया गया है। अनुष्ठान में 40 क्विंटल घी, 25 क्विंटल काले तिल, चावल, जौ, शर्करा, विविध हवन सामग्री तथा लगभग 3000 क्विंटल समिधा का उपयोग किया जाएगा। 150 गुणा 150 फीट की भव्य यज्ञशाला में दो हाथ गहरी 200 यज्ञ वेदियां बनाई गई हैं, जहां 200 यजमान 43 दिनों तक नियमित हवन करेंगे। प्रत्येक वेदी में लगभग डेढ़ लाख आहुतियां देने की क्षमता बताई गई है।

देशभर के अनेक संत-महात्माओं के इस महायज्ञ में शामिल होने की संभावना है। इनमें अयोध्या के स्वामी राघवाचार्य , श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी, प्रसिद्ध कथावाचक रमेशभाई ओझा सहित कई अन्य संत शामिल होंगे। यज्ञाचार्य के रूप में वेदमूर्ति पं. सुनील दीक्षित (काशी) तथा उपाचार्य के रूप में वेदमूर्ति पं. गणेश जोगलकर (गोकर्ण पीठ) आचार्यत्व निभाएंगे।

आयोजकों के अनुसार प्रतिदिन एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान है। 2000 पंडितों के लिए अनग आवास, संतों व अतिथियों के लिए अलग परिसर, छह विशाल भोजनशालाएं तथा हजारों श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था की गई है।

यातायात, सुरक्षा, चिकित्सा, पेयजल और स्वच्छता के लिए विभिन्न समितियां गठित की गई हैं और सैकड़ों स्वयंसेवक सेवा कार्य में जुटेंगे।

इस ऐतिहासिक महायज्ञ को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरण का व्यापक अभियान माना जा रहा है, जिससे पुष्कर को पुनः देश और दुनिया की आध्यात्मिक धुरी के रूप में स्थापित करने की आशा व्यक्त की जा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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