पंचकोष सिद्धांत भारतीय ज्ञान परंपरा का आधार: कुलगुरु

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पंचकोष सिद्धांत भारतीय ज्ञान परंपरा का आधार: कुलगुरु


आयुर्वेद विश्वविद्यालय में पंचकोश सिद्धांत पर विशिष्ट व्याख्यान आयोजित

जोधपुर, 20 जनवरी (हि.स.)। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय की विश्व आयुर्वेद परिषद इकाई द्वारा कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविन्द सहाय शुक्ल की अध्यक्षता में एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय उज्जैन के मौलिक विभाग के सह आचार्य एवं विभागाध्यक्ष डॉ. रामतीर्थ शर्मा रहे, जिन्होंने पंचकोष सिद्धांत से भारतीय व्यक्तित्व के विकास विषय पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। कुलगुरु प्रोफेसर वैद्य गोविन्द सहाय शुक्ल ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि पंचकोश सिद्धांत भारतीय ज्ञान परंपरा की एक सशक्त अवधारणा है, जो व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ समाज को भी सकारात्मक दिशा प्रदान करती है।

डॉ. रामतीर्थ ने पंचकोश सिद्धांत के अंतर्गत अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय एवं आनंदमय कोश की व्याख्या करते हुए भारतीय संस्कृति में संतुलित एवं आनंदमय जीवन की अवधारणा को स्पष्ट किया। इस अवसर पर पीजीआईए के प्राचार्य प्रोफेसर चंदन सिंह ने भारतीय संस्कृति की प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के प्रारंभ में विश्व आयुर्वेद परिषद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ राकेश कुमार शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत अभिनंदन किया। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष प्रोफेसर देवेन्द्र सिंह चाहर ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के डीन आयुर्वेद संकाय प्रोफेसर महेंद्र कुमार शर्मा, प्रोफेसर नीलिमा रेड्डी, प्रोफेसर दिनेश चंद शर्मा, प्रोफेसर हरीश कुमार सिंघल सहित अनेक संकाय सदस्य,स्नातक एवं स्नातकोत्तर अध्येता उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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