नगर निगम के कॉल सेंटर पर आ रही आमजन की शिकायतों की पेंडेंसी बढ़ी
जयपुर, 1 जनवरी (हि.स.)। महापौर का कार्यकाल पूरा होने के बाद सरकार ने चुनाव कराने की बजाय निगम में प्रशासक नियुक्त कर दिया। निगम में तैनात प्रशासन आमजन की शिकायतों का निस्तारण कर उन्हें राहत देने में नाकाम साबित हो रहे है। महापौर का कार्यकाल 9 नवम्बर को पूरा हुआ था, इसके बाद सरकार ने दोनों निगम का एकीकरण कर दिया और प्रशासक की नियुक्ति कर दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार महापोर के कार्यकाल में जनप्रतिनिधि जनता की शिकायतों की सुनवाई कर निस्तारण करते थे, लेकिन प्रशासन के नियुक्त होने के बाद आमजन की शिकायतों की सुनवाई करने वाला कोई नहीं बचा है। आमजन द्वारा निगम के कॉल सेंटर पर जो शिकायतें की जाती है उनका भी निस्तारण नहीं हो रहा है। विशेष बात यह है कि कॉल सेंटर पर सफाई की शिकायतों में से केवल 25 प्रतिशत, सीवर की शिकायतों में से केवल 40 प्रतिशत का ही निस्तारण किया गया है। इससे आमजन में निगम प्रशासन को लेकर लगातार आक्रोश बढ़ रहा है। जयपुर शहर में कहीं बंदरों का आतंक है, तो कहीं आवारा मवेशियों का डेरा, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। इसके साथ ही, सीवर लाइन टूटने और नालियों की नियमित सफाई न होने से जलभराव की समस्या भी आम हो गई है। शहर के विभिन्न वार्डों से आ रही नागरिक समस्याओं ने एक बार फिर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे मामले को लेकर निगम प्रशासक आईएएस पूनम और निगम आयुक्त गौरव सैनी से सम्पर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
सफाई और सीवरेज की शिकायतों का नहीं हो रहा निस्तारण
प्राप्त जानकारी के अनुसार निगम के कॉल सेंटर पर दिसम्बर माह में बिजली को लेकर 3101 शिकायतें दर्ज हुई, उनमें से 421 शिकायतें अभी लम्बित है। वहीं डोर टू डोर कचरा उठाने को लेकर मिली 1288 शिकायतों में से 165 का निस्तारण नहीं किया गया। 30 दिन में सीवर की 1543 शिकायतों में से 956 और सफाई को लेकर 1442 शिकायतों में से 972 शिकायतें अभी पेंडिंग है। आमजन को राहत देने को लेकर निगम प्रशासक पूरी तरह से सक्रिय नजर नहीं आ रहे है। आमजन की शिकायतों के साथ विकास को लेकर भी प्रशासक कोई खास काम नहीं कर पा रहे है।
मुख्य सड़कों पर सफाई, बाकी में कचरे का ढेर
निगम में प्रशासक की नियुक्ति के बाद से सफाई व्यवस्था बेपटरी नजर आने लगी है। मुख्य सड़कों पर तो सफाई हो जाती है लेकिन कॉलोनी और गलियों में न तो पूरी तरह से सफाई हो पा रही है और ना ही कचरें का निस्तारण किया जा रहा है। इसके चलते गलियों और कॉलोनियों में कचरे के ढेर नजर आ रहे है। सफाई को लेकर निगम में लगातार शिकायतें पहुंच रही है लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
नए बने झालाना और वैशाली नगर जोन कार्यालय नहीं हो पाए शुरू
निगमों के एकीकरण के बाद झालाना और वैशाली नगर जोन बनाए गए थे। जोन बनाए जाने के करीब 45 दिन बाद भी जोन कार्यालय नहीं शुरू हो पाए है। ऐसे में इन इलाकों में आमजन को शिकायतों के साथ दस्तावेज बनवाने सहित अन्य कामों को लेकर निगम कार्यालय आना पड़ रहा है। इससे आमजन को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश

