धर्म की स्थापना होगी, भारत फिर बनेगा आध्यात्मिक गुरु: बाबा उमाकांत
जयपुर, 13 अगस्त (हि.स.)। संत बाबा उमाकान्त महाराज ने सत्संग में कहा कि लोगों को धर्म, ध्यान और भजन की ओर प्रेरित करने के प्रयास लगातार जारी हैं। यदि लोग थोड़ी मेहनत और सेवा भाव से काम करें तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन तेजी से आएगा। उन्होंने कहा कि धर्म की स्थापना होगी और एक समय ऐसा आएगा जब भारत फिर से आध्यात्मिक गुरु बनेगा।
उन्होंने कहा कि भारत में आध्यात्मिक और धार्मिक परंपराओं की जड़ें गहरी हैं। विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्र ऋषि-मुनियों की भूमि रहे हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि पहाड़ी क्षेत्रों से शराब, कबाब और शबाब जैसी प्रवृत्तियों को दूर कर लोगों को ध्यान, भजन और पूजा से जोड़ा जाए तो वहां का कण-कण पूजनीय बन सकता है।
बाबा उमाकान्त ने कहा कि आज कई लोग ईश्वर को भूलकर केवल कमाने, खाने और मौज-मस्ती को जीवन का उद्देश्य मानने लगे हैं। ऐसे लोगों को ईश्वरवादी बनाना और अच्छे संस्कारों से जोड़ना समाज और देश के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया को गणना का ज्ञान दिया और धर्म की परंपरा भी यहीं से आगे बढ़ी।
उन्होंने सेवा और त्याग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि व्यक्ति की पहचान उसके रूप, धन या शक्ति से नहीं, बल्कि उसके अच्छे कर्मों से होती है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के साथ गोप-ग्वालों और भगवान राम के साथ हनुमान, जामवंत व अंगद जैसे सहयोगियों का नाम आज भी श्रद्धा से लिया जाता है। जो व्यक्ति अच्छे कार्यों में योगदान देता है, सेवा और त्याग करता है, उसकी कीर्ति लंबे समय तक बनी रहती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

