जयपुर में गणपति जन्मोत्सव की धूम, बाल स्वरूप से राजसी शृंगार तक हुए दुर्लभ दर्शन

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जयपुर में गणपति जन्मोत्सव की धूम, बाल स्वरूप से राजसी शृंगार तक हुए दुर्लभ दर्शन


जयपुर में गणपति जन्मोत्सव की धूम, बाल स्वरूप से राजसी शृंगार तक हुए दुर्लभ दर्शन


जयपुर में गणपति जन्मोत्सव की धूम, बाल स्वरूप से राजसी शृंगार तक हुए दुर्लभ दर्शन


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जयपुर में गणपति जन्मोत्सव की धूम, बाल स्वरूप से राजसी शृंगार तक हुए दुर्लभ दर्शन


जयपुर में गणपति जन्मोत्सव की धूम, बाल स्वरूप से राजसी शृंगार तक हुए दुर्लभ दर्शन


जयपुर, 14 सितंबर (हि.स.)। गणेश चतुर्थी पर सोमवार को राजधानी जयपुर प्रथम पूज्य भगवान गणेश की भक्ति में डूबी रही। शहर के प्रमुख गणेश मंदिरों में तड़के से ही श्रद्धालुओं की कतारें लग गईं। कहीं गणपति के बाल स्वरूप के दुर्लभ दर्शन हुए तो कहीं राजसी शृंगार में विराजे गजानन ने भक्तों को मोहित किया। मंदिरों में अभिषेक, विशेष शृंगार, छप्पन भोग, मोदक अर्पण, भजन-कीर्तन, महाआरती और विशेष झांकियों के आयोजन हुए। मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं की कतार जेएलएन रोड तक पहुंच गई। सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए।

मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में गणेशजी महाराज का विशेष राजसी शृंगार किया गया। महंत कैलाश शर्मा के अनुसार भगवान को हीरे-जड़ा स्वर्ण मुकुट, नौलखा हार और अन्य आभूषण धारण कराए गए। चांदी के सिंहासन पर राजसी स्वरूप में विराजे गणेशजी के दर्शन के लिए सुबह करीब 5 बजे से ही श्रद्धालुओं की कतार लग गई। भीड़ बढ़ने पर कतार मंदिर से निकलकर जेएलएन रोड तक पहुंच गई। गणपति बप्पा के जयकारों और भक्ति गीतों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय रहा।

सुबह 5 बजे मंगला आरती के साथ दर्शन शुरू हुए, जो रात 11.40 बजे शयन आरती तक जारी रहे। इस तरह श्रद्धालुओं को 19 घंटे से अधिक समय तक दर्शन का अवसर मिला।

भारी भीड़ को देखते हुए मोतीडूंगरी मंदिर में 72 नए सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई। इनकी रिकॉर्डिंग 30 दिन तक सुरक्षित रखी जाएगी। सुरक्षा जांच के लिए छह डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर और छह हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर लगाए गए।

श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए छह प्रवेश और आठ निकासी लाइनें बनाई गईं, जबकि एक लाइन प्रवेश पास के लिए रखी गई। एमडी रोड, जेएलएन मार्ग और तख्तेशाही रोड से प्रवेश दिया गया। बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए 100 ई-रिक्शा लगाए गए। इलेक्ट्रिक लो-फ्लोर बसों की सुविधा भी उपलब्ध रही। व्यवस्थाओं में करीब 500 स्वयंसेवक लगाए गए।

श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए डीजीपी ने भी मोतीडूंगरी गणेश मंदिर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने महंत कैलाश शर्मा के साथ व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस दौरान पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था देखने के बाद डीजीपी ने गणेशजी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने भी गणेश चतुर्थी पर मोतीडूंगरी गणेश मंदिर पहुंचकर दर्शन और पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। साथ ही राजस्थान की उन्नति और विकास के लिए मंगलकामना की। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश की कृपा से राजस्थान प्रगति, विकास और समृद्धि के पथ पर आगे बढ़े तथा प्रदेशवासियों के जीवन में सुख-शांति बनी रहे।

ब्रह्मपुरी स्थित ऐतिहासिक गढ़ गणेश मंदिर में महंत प्रदीप औदीच्य के सान्निध्य में महा गणपति जन्मोत्सव मनाया गया। गणेश चतुर्थी पर मंदिर की विशेष परंपरा के अनुसार गणपति महाराज के बिना सूंड और बिना वस्त्र वाले बाल स्वरूप के दर्शन हुए। यह दुर्लभ पुरुषाकृति बाल स्वरूप वर्ष में केवल एक बार जन्मोत्सव पर दिखाई देता है।

सुबह 4 बजे पंचामृत अभिषेक के बाद पत्र-पुष्प की मालाओं से विशेष शृंगार किया गया। बाल स्वरूप के कारण गणपति को वस्त्र धारण नहीं कराए गए। सुबह 5 बजे मंगला आरती के साथ सहस्र दुर्वाचन और एक हजार मोदकों का अर्पण किया गया। दोपहर 12 बजे भोग आरती के बाद सहस्र नामावली से हवन, शाम 7 बजे संध्या आरती और रात 12 बजे शयन आरती हुई। मंदिर में विशेष झांकी भी सजाई गई।

मंगलवार को पारंपरिक मेले का आयोजन हुआ। सुबह अभिषेक और नवीन वस्त्र धारण कराने के बाद मंगला आरती और दोपहर में भोग आरती हुई। इसके बाद भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा के मंदिर पहुंचने के बाद शयन आरती हुई। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए बैरिकेडिंग, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था की गई।

चांदपोल स्थित प्राचीन परकोटा गणेश मंदिर में मंगला आरती के साथ जन्मोत्सव की शुरुआत हुई। सुबह पंचामृत अभिषेक के बाद गणेशजी का सोने के वर्क से विशेष शृंगार किया गया। महंत अमित शर्मा ने बताया कि गणेश चतुर्थी पर छप्पन भोग अर्पित किया गया और विशेष झांकी सजाई गई। मंदिर में दिनभर भजन-कीर्तन हुए। शाम को सैकड़ों दीपकों से महाआरती की गई। मंदिर को रोशनी, फूलों और बंदरवाल से सजाया गया।

दिल्ली रोड स्थित बंगाली बाबा गणेश मंदिर में दो दिवसीय गणेश चतुर्थी महोत्सव के दौरान अभिषेक, विशेष शृंगार, लड्डुओं की झांकी, महाआरती, बैंड वादन और भजन संध्या हुई। सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की कतार लगी रही।

मुख्य संरक्षक रघुवीर शरण अग्रवाल, अध्यक्ष नारायण लाल अग्रवाल और उपाध्यक्ष संजय पतंगवाला ने बताया कि सुबह गणेशजी को मोदक अर्पित किए गए। दोपहर में महाआरती और बैंड वादन हुआ। भगवान को नई पोशाक धारण कराकर विशेष शृंगार किया गया। शाम को महामंत्री गणेश लूनीवाल और कोषाध्यक्ष विष्णु अग्रवाल के संयोजन में भजन संध्या हुई। स्थानीय कलाकारों ने ‘गाइये गणपति’ और ‘जय बोलो गणेश जी महाराज की’ सहित भजनों की प्रस्तुतियां दीं।

महोत्सव में 2500 किलो लड्डुओं की प्रसादी वितरित की गई। इसे तैयार करने में 1000 किलो चीनी, 400 किलो घी और 400 किलो बेसन का इस्तेमाल किया गया।

अतिप्राचीन दाहिनी सूंड़ और दक्षिणमुखी नहर के गणेशजी महाराज मंदिर में भी गणेश चतुर्थी पर विशेष आयोजन हुए। महंत पं. जय शर्मा के सान्निध्य में सुबह 5 बजे गणेशजी को राजशाही पोशाक और स्वर्ण मंडित मुकुट धारण कराया गया। इसके बाद मंगला आरती हुई। गणपति का अभिषेक और विधिवत पूजन किया गया। छप्पन भोग अर्पित किया गया। बैंड वादन और आतिशबाजी के बीच श्रद्धालुओं ने विशेष शृंगार में सजे गणेशजी के दर्शन किए।

कनक घाटी स्थित ठिकाना मंदिर श्री गोविंद देवजी महाराज के अंतर्गत मातहत प्राचीन मंदिर श्री सिद्धि विनायक गणेशजी में महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में पंचामृत अभिषेक हुआ। इसके बाद नवीन पोशाक और विशेष माला धारण कराई गई। भगवान को पांच तरह के मोदक, पांच प्रकार के फल और गुड़ का भोग अर्पित किया गया। मंदिर को बंदरवाल और विशेष रोशनी से सजाया गया।

इधर जयनिवास बाग स्थित मुख्य ठिकाना मंदिर में ठाकुर गोविंद देवजी महाराज का विशेष अलंकार शृंगार किया गया। मंगला आरती के बाद पंचामृत अभिषेक कर ठाकुरजी को नवीन केसरिया पोशाक धारण कराई गई और विशेष भोग लगाया गया। मंदिर में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ रही।

गणेश जन्मोत्सव का समापन 15 सितंबर को मोतीडूंगरी गणेशजी के नगर भ्रमण के साथ होगा। शोभायात्रा मोतीडूंगरी गणेश मंदिर से रवाना होकर एमडी रोड, जौहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार, गणगौरी बाजार और नाहरगढ़ रोड होते हुए गढ़ गणेश मंदिर पहुंचेगी। इसके साथ गणेश जन्मोत्सव का समापन होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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