चारण साहित्य केवल अतीत की धरोहर नहीं, राष्ट्र चेतना का जीवंत दस्तावेज : प्रो. अम्बादान रोहड़िया
चारण साहित्य शोध संस्थान के स्थापना दिवस समारोह में साहित्यकारों, शोधार्थियों एवं समाज प्रतिभाओं का सम्मान
अजमेर, 15 जून(हि.स.)। साहित्य समाज की आत्मा और संस्कृति का संवाहक होता है। चारण साहित्य ने सदियों से सत्य, राष्ट्रभक्ति, लोकमंगल और सामाजिक चेतना के मूल्यों को संरक्षित कर भारतीय संस्कृति को समृद्ध किया है। इसी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के संकल्प के साथ अजमेर स्थित चारण साहित्य शोध संस्थान में स्थापना दिवस के अवसर पर भव्य साहित्य समारोह आयोजित किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों, शोधार्थियों एवं समाज प्रतिभाओं का सम्मान किया गया।
समारोह के मुख्य वक्ता प्रख्यात विद्वान प्रो. अम्बादान रोहड़िया ने “चारण साहित्य में राष्ट्रीय अस्मिता” विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि चारण सदैव सत्य का उपासक रहा है। उसके साहित्य में राष्ट्र सम्मान, स्वाभिमान और गौरव की भावना प्रमुख रूप से परिलक्षित होती है। उन्होंने कहा कि चारण साहित्य भारतीय सांस्कृतिक चेतना का अमूल्य दस्तावेज है।
कार्यक्रम में गुजरात के पूर्व सांसद पुष्पदान गढ़वी, सेवानिवृत्त आईएएस सी.डी. आढ़ा, अजय विक्रम सिंह, राजेन्द्र रत्नु, धरोहर संरक्षण प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत, प्रो. रामसिंह आढ़ा, पद्मश्री डॉ. सी.पी. देवल तथा संस्थान अध्यक्ष भंवर सिंह चारण सहित राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, दिल्ली एवं मध्यप्रदेश से आए गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मोहनदान रत्नू द्वारा माताजी के डिंगल छंदों की प्रस्तुति से हुआ। इसके पश्चात डिंगल साहित्य के मूर्धन्य कवि डूंगरदान आशिया सहित दिवंगत साहित्यकारों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। समारोह में 107 वर्षीय शुभकरण आढ़ा एवं 103 वर्षीय आईदान लखावत को ‘शतायु समाज रत्न सम्मान’ प्रदान किया गया।
संस्थान के संस्थापक एवं धरोहर संरक्षण प्राधिकरण अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने आऊवा (पाली) में चारण समाज द्वारा किए गए ऐतिहासिक सत्याग्रह को समाज का गौरव बताते हुए उसके इतिहास को गांव-गांव तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने परंपरागत बहियों के डिजिटलीकरण पर भी प्रकाश डालते हुए संस्थान के प्रयासों की सराहना की।
प्रथम सत्र में प्रो. रामसिंह आढ़ा ने कवि दुरसा आढ़ा के साहित्यिक योगदान पर व्याख्यान दिया। वहीं चारणी नीति साहित्य, पर्यावरण संरक्षण एवं ओरण संस्कृति जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
समारोह में ‘डॉ. शक्तिदान कविया स्मृति डिंगल साहित्य सम्मान’ राजस्थानी साहित्यकार लक्ष्मणदान कविया (खेण) को प्रदान किया गया। साथ ही चारण साहित्य विषय पर उल्लेखनीय शोध कार्य करने वाले डॉ. मीनाक्षी बोराणा, डॉ. अशरिया मोहन गढ़वी, डॉ. हरदेव कुमार एवं डॉ. बलराम चावड़ा को शोध सम्मान एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित प्रवीण रत्नू, राजस्थान न्यायिक सेवा में चयनित कविता चारण तथा राजस्थान प्रशासनिक सेवा में चयनित यशवंत सांदू, दिव्यराज सिंह देवल सहित विभिन्न राजकीय सेवाओं में चयनित समाज प्रतिभाओं का भी अभिनंदन किया गया।
द्वितीय सत्र में पद्मश्री विजयदान देथा के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में पद्मश्री डॉ. सी.पी. देवल ने व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए साहित्य में लोकभावना के महत्व को रेखांकित किया। प्रो. गजादान चारण ने चारण नीति साहित्य तथा गिरधरदान रत्नू ने चारणों के सत्याग्रहों पर अपने विचार व्यक्त किए।
संस्थान अध्यक्ष भंवर सिंह चारण ने स्वागत उद्बोधन देते हुए संस्थान की गतिविधियों एवं विकासात्मक कार्यों की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन संस्थान की महामंत्री डॉ. सरोज लखावत ने किया तथा उपाध्यक्ष मदनदान ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

