ग्रासरूट मीडिया फाउंडेशन के कार्यक्रम सम्मुख में चार जनवरी को होगा कविता पाठ का आयोजन

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ग्रासरूट मीडिया फाउंडेशन के कार्यक्रम सम्मुख में चार जनवरी को होगा कविता पाठ का आयोजन


जयपुर, 02 जनवरी (हि.स.)। गीत—गजल और कविता पाठ के कार्यक्रम सम्मुख में चार जनवरी को कविता पाठ किया जाएगा। यह आयोजन कांस्टीट्यूशन क्लब में किया जाएगा। ग्रासरूट मीडिया फाउंडेशन के प्रमोद शर्मा ने बताया कि रविवार को भोपाल से संगीता गुंदेचा, जबलपुर से बाबुषा कोहली और शिमला से श्वेता मिश्रा इस कार्यक्रम में कविता पाठ के लिए जयपुर आ रही हैं। इसी अवसर पर बाबुषा कोहली के हाल ही में प्रकाशित कविता संग्रह सत्य मधुमक्खी का छत्ता है और किशन प्रणय के उपन्यास मालवा डायरी का विमोचन भी किया जाएगा। यह कार्यक्रम राजस्थान फोरम के सहयोग से आयोजित किया जाता है।

किशन प्रणय समकालीन हिन्दी, राजस्थानी और मालवी साहित्य के उभरते हुए युवा कवि, उपन्यासकार एवं साहित्यकार हैं। मूलतः कोटा के रहने वाले किशन प्रणय बहुभाषिक रचनात्मकता के लिए विशेष रूप से पहचाने जाते हैं। हिंदी में 4 काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। राजस्थानी में 3 काव्य और 1 व्यंग्य संग्रह का लेखन किया है। उपन्यास मालवा डायरी में वहां के भूगोल के साथ लोक और जीवन का भी लेखन है।

बाबुषा कोहली का पहला कविता संग्रह प्रेम गिलहरी 2014 में भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित व पुरस्कृत हुआ है। 'बावन चिट्ठियाँ' (2018) रज़ा पुस्तक माला के अन्तर्गत प्रकाशित व वागीश्वरी पुरस्कार से सम्मानित तथा कविता संग्रह 'लौ' (2025) 'शब्द शिल्पी पुरस्कार' से सम्मानित है।

श्वेता मिश्रा मूलतः हिमाचल प्रदेश से ताल्लुक रखती हैं। वह लेखिका तथा मोटिवेशनल स्पीकर एवं सोशल एक्टिविस्ट भी है। वर्तमान में केनरा बैंक शिमला में वरिष्ठ शाखा प्रबंधक है।

संगीता गुन्देचा बहुत ही प्रतिभाशाली कथाकार, कवयित्री, अनुवादक और निबंधकार है। उनकी पुस्तकें पडिक्कमा, एकान्त का मानचित्र प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके साथ ही उन्होंने उदाहरण काव्य (प्राकृत-संस्कृत कविताओं के हिन्दी अनुवाद), मटमैली स्मृति में प्रशान्त समुद्र (जापानी कवि शुन्तारो तानीकावा की कविताओं के हिन्दी अनुवाद), नाट्यदर्शन (कावालम् नारायण पणिक्कर, हबीब तनवीर और रतन थियाम से संवाद), कावालम् नारायण पणिक्कर: परम्परा एवं समकालीनता, भास का रंगमंच, समकालीन रंगकर्म में नाट्यशास्त्र की उपस्थिति, टोट बटोट उर्दू लेखक सूफी तबस्सुम की नज़्मों का सम्पादन किया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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