कृषि विभाग एक्शन मोड में : यूरिया डायवर्जन व जमाखोरी पर सख्ती, जैविक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश

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कृषि विभाग एक्शन मोड में : यूरिया डायवर्जन व जमाखोरी पर सख्ती, जैविक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश


बीकानेर, 11 अप्रैल (हि.स.)। जिले में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर कृषि विभाग पूरी तरह सतर्क है और यूरिया के दुरुपयोग, जमाखोरी तथा गैर-कृषि कार्यों में उपयोग को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

उर्वरक आपूर्ति समीक्षा के दौरान अतिरिक्त निदेशक (कृषि विस्तार) त्रिलोक कुमार जोशी ने बताया कि जिले में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है और किसानों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि खरीफ सीजन की बुवाई अभी प्रारंभ नहीं हुई है, इसके बावजूद यूरिया की अधिक बिक्री को देखते हुए विभाग एक्शन मोड में आ गया है।

यूरिया के संभावित डायवर्जन, जमाखोरी एवं अन्य राज्यों में अवैध परिवहन को रोकने के लिए कृषि आदान निरीक्षक पूरी मुस्तैदी के साथ उर्वरक विक्रेताओं के औचक निरीक्षण कर रहे हैं। विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाकर पीओएस मशीन के माध्यम से भंडारित यूरिया का भौतिक सत्यापन भी किया जा रहा है।

उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत ने बताया कि अप्रैल माह में 'धरती माता बचाओ' अभियान के अंतर्गत निगरानी समितियों की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। साथ ही 'आपणो खेत-आपणी खाद' अभियान के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य संवर्धन पर जोर देते हुए रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों को हरी खाद, जैविक खाद एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

अतिरिक्त निदेशक ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आईएफएमएस पोर्टल से विक्रेतावार अधिक बिक्री का विवरण प्राप्त कर संबंधित किसानों का भौतिक सत्यापन किया जाए और अधिक बिक्री के कारणों की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि दोषी पाए जाने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। नियमों के उल्लंघन पर कारण बताओ नोटिस, लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण के साथ एफआईआर जैसी वैधानिक कार्यवाही भी की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

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