कांस के फूलों ने दी मानसून की विदाई की दस्तक

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कांस के फूलों ने दी मानसून की विदाई की दस्तक


जयपुर, 09 सितंबर (हि.स.)। मानसून के विदा होने का संदेश अब प्रकृति भी देने लगी है। जयपुर-कूकस रोड के आसपास इन दिनों पहाड़ियों की हरियाली के बीच दूर-दूर तक खिले कांस के सफेद फूल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। ऐसा लग रहा है मानो हरी पहाड़ियों के बीच धरती ने सफेद चादर ओढ़ ली हो। हवा के साथ लहराते कांस के फूल बरसात के अंतिम दौर और शरद ऋतु के आगमन का संकेत दे रहे हैं।

भारतीय लोक परंपरा में कांस के फूलों का खिलना लंबे समय से वर्षा ऋतु की विदाई से जोड़ा जाता रहा है। गोस्वामी तुलसीदास ने भी रामचरितमानस में लिखा है-“फूले कास सकल मही छाई, जनु बरसा कृत प्रकट बुढ़ाई।” यानी कांस के फूलों से पूरी धरती ढंक गई है और ऐसा प्रतीत होता है जैसे वर्षा ऋतु बूढ़ी होकर विदाई ले रही हो।

कांस सामान्यतः खाली जमीन, सड़क किनारे, नदी-नालों के आसपास और नम मिट्टी वाले खुले क्षेत्रों में स्वतः उगता है। आमतौर पर इसके छोटे-छोटे झुंड ही दिखाई देते हैं, लेकिन कूकस रोड के आसपास कई जगह यह बड़े क्षेत्र में फैला नजर आ रहा है। पहाड़ियों की हरी पृष्ठभूमि के बीच सफेद पुष्पक्रमों का यह विस्तार किसी प्राकृतिक चित्र जैसा दिखाई देता है।

यह घास कुल का बहुवर्षीय पौधा है और जंगली गन्ने की प्रजाति से संबंधित माना जाता है। इसकी खासियत यह है कि यह जमीन के भीतर मौजूद राइजोम के माध्यम से तेजी से फैल सकता है। मानसून के दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी मिलने के बाद इसकी वृद्धि तेज होती है और मौसम के अंतिम चरण में इसके सफेद, रेशमी पुष्पक्रम दिखाई देने लगते हैं।

कांस के फूल भले ही खूबसूरती के लिए पहचाने जाते हों, लेकिन इसका पारिस्थितिकी तंत्र में भी महत्व है। इसकी जड़ें मिट्टी को बांधने और भूमि कटाव को कम करने में मदद करती हैं। हालांकि किसी क्षेत्र में इसका अत्यधिक विस्तार स्थानीय वनस्पतियों की संरचना को प्रभावित कर सकता है।

ग्रामीण जीवन में कभी कांस के सूखे पुष्पक्रमों का उपयोग गद्दों और तकियों में भराव सामग्री के रूप में भी किया जाता था।

आधुनिक दौर में यह परंपरागत उपयोग लगभग समाप्त हो गया है।

कूकस रोड का यह दृश्य इसलिए खास है क्योंकि इसमें मौसम के बदलाव की पूरी कहानी नजर आती है—एक ओर मानसून की हरियाली और दूसरी ओर सफेद कांस के फूल। प्रकृति का यह अनोखा नजारा मानो साफ कह रहा है कि बरसात अब विदाई की ओर है और शरद ऋतु दस्तक दे रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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