ईएनटी चिकित्सा में एआई से लेकर रोबोटिक सर्जरी तक भविष्य की तकनीकों पर हुआ मंथन

WhatsApp Channel Join Now
ईएनटी चिकित्सा में एआई से लेकर रोबोटिक सर्जरी तक भविष्य की तकनीकों पर हुआ मंथन


जयपुर, 26 सितंबर (हि.स.)। भारत में कान, नाक और गला रोगों की चिकित्सा का भविष्य अब केवल बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं रहेगा। बीमारी की समय रहते पहचान, रोकथाम और मरीज की जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत उपचार पर जोर बढ़ेगा। इंडियन एकेडमी ऑफ ओटोलैरिंगोलॉजी एंड हेड-नेक सर्जरी (आईएओएचएनएस) की 12वीं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में शनिवार को आयोजित तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने ईएनटी चिकित्सा में तकनीक और मानवीय संवेदना के बेहतर समन्वय की जरूरत बताई। सम्मेलन जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित हो रहा है।

ईएनटी सर्जन डॉ. अनुभूति धानुका ने कहा कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल डायग्नोस्टिक्स, टेली-ईएनटी और मिनिमली इनवेसिव तकनीकें मरीजों की देखभाल को अधिक सुलभ और तकनीक आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। एआई एंडोस्कोपी, इमेजिंग और वॉयस एनालिसिस में सहायता कर सकता है, जिससे बीमारी से जुड़े सूक्ष्म बदलावों की पहले पहचान संभव हो सकती है।

उन्होंने कहा कि खासतौर पर लैरिंगोलॉजी में डिजिटल वॉयस एनालिसिस, स्ट्रोबोस्कोपी और एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स के जरिए ऑब्जेक्टिव वॉयस असेसमेंट को बड़े शहरों से बाहर भी अधिक सुलभ बनाया जा सकता है। भारत में एलर्जिक राइनाइटिस, क्रॉनिक साइनसाइटिस, हियरिंग लॉस और स्लीप-डिसऑर्डर्ड ब्रीदिंग का बढ़ता बोझ मल्टीडिसिप्लिनरी ईएनटी केयर की मांग बढ़ा सकता है।

डॉ. धानुका ने कहा कि तकनीक कभी सर्जन का स्थान नहीं ले सकती। भविष्य उन ईएनटी विशेषज्ञों का होगा, जो सर्जिकल कौशल के साथ डेटा, एआई और बहुविषयक निर्णय क्षमता को जोड़ सकेंगे। उनके अनुसार, डॉक्टर की भूमिका केवल तकनीक के इस्तेमाल तक सीमित नहीं होगी, बल्कि मरीज की जटिल स्थिति को हर पहलू से समझकर सही उपचार का निर्णय लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा।

उन्होंने कहा कि कॉक्लियर इम्प्लांट और नई पीढ़ी की हियरिंग तकनीकें अधिक लोगों तक पहुंचने की संभावनाएं बढ़ा रही हैं। पिडियाट्रिक एयरवे और स्लीप मेडिसिन भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण क्षेत्र बन सकते हैं। बच्चों में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया और एयरवे डिसऑर्डर को लेकर जागरूकता बढ़ने से इन क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाओं की जरूरत बढ़ सकती है।

डॉ. धानुका ने बताया कि ऑफिस-बेस्ड प्रोसीजर, लेजर और मिनिमली इनवेसिव इंटरवेंशन के बढ़ते इस्तेमाल से कुछ ईएनटी उपचारों को ऑपरेशन थिएटर से बाहर करने की दिशा में बदलाव देखने को मिल सकता है। वहीं टेली-ईएनटी और रिमोट डायग्नोस्टिक्स महानगरों और छोटे शहरों के बीच विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता के अंतर को कम करने में मदद कर सकते हैं।

तकनीकी सत्र में पीजी प्रशिक्षण की मौजूदा चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। पीजी कर रहे चिकित्सकों ने अपने अनुभव साझा किए और प्रशिक्षण व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर विचार रखा। सत्र का संचालन एम्स जोधपुर के डॉ. अमित गोयल ने किया।

अमृतसर के डॉ. प्रहलाद दुग्गल ने हेड एंड नेक कैंसर के उपचार के बाद मरीजों के जीवन की गुणवत्ता पर चर्चा करते हुए कहा कि स्वस्थ होना केवल शारीरिक रूप से ठीक होना नहीं है, बल्कि जीवन में नई ऊर्जा और संतुलन हासिल करना भी है। सर्जरी या रेडिएशन के बाद निगलने, बोलने और गर्दन में अकड़न जैसी समस्याएं हो सकती हैं। स्पीच थेरेपी, फिजियोथेरेपी और पौष्टिक नरम आहार पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि लार ग्रंथियों की शुष्कता से राहत के लिए दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीना और मुंह की स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है। शारीरिक बदलावों को स्वीकार करने के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण है। परिवार का सहयोग, ध्यान और काउंसलिंग मरीज का आत्मविश्वास लौटाने में मदद कर सकते हैं।

एसएमएस अस्पताल के ईएनटी विभाग के वरिष्ठ आचार्य और कॉन्फ्रेंस के साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. पवन सिंघल ने बताया कि दूसरे दिन ईएनटी से जुड़े कई विषयों पर सत्र आयोजित हुए। इनमें बधिर बच्चों के जीवन, रक्त वाहिकाओं के ट्यूमर, कैंसर के विभिन्न चरण, स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा, स्कल बेस में ईएनटी की भूमिका, चक्कर आने की समस्या और स्लीप एपनिया सहित कई विषय शामिल रहे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

Share this story