सागर केंद्रीय जेल में 900 बंदियों को बांधा परमात्म रक्षासूत्र, सकारात्मक जीवन का दिया संदेश
सागर, 25 अगस्त (हि.स.)। रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर मध्य प्रदेश के सागर केंद्रीय जेल में ब्रह्माकुमारी संस्थान की ओर से ‘परमात्म रक्षासूत्र’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान ब्रह्माकुमारी बहनों ने जेल में निरुद्ध 900 से अधिक बंदियों को रक्षासूत्र बांधकर उन्हें आत्मसंयम, पवित्रता और सकारात्मक जीवन का संकल्प दिलाया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जेल डीआईजी एम.आर. पटेल ने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि परिस्थितियां कैसी भी रही हों, व्यक्ति के भीतर स्वयं को बदलने की संभावना हमेशा बनी रहती है। उन्होंने कहा कि बीते हुए समय को बदला नहीं जा सकता, लेकिन वर्तमान में श्रेष्ठ संकल्प लेकर भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है। राजयोग के अभ्यास के माध्यम से मन को शांत और मजबूत बनाकर जीवन को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है।
जेल अधीक्षक रमेशचंद्र आर्य ने बंदियों से कहा कि उन्हें संकल्प लेना चाहिए कि भविष्य में दोबारा गलत रास्ते पर कदम नहीं रखेंगे। उन्होंने कहा कि अपने आचरण और कर्मों में सकारात्मक बदलाव लाकर परिवार और समाज के लिए बेहतर उदाहरण बनना ही वास्तविक अर्थों में जेल से मुक्ति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सागर क्षेत्र की संचालिका बीके छाया बहन ने रक्षाबंधन के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक नहीं है। इसका व्यापक अर्थ स्वयं को तनाव, नकारात्मक विचारों और बुराइयों से बचाने का संकल्प लेना भी है।
महिला बंदियों को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी खुशबू बहन ने कहा कि वर्तमान समय में केवल महिलाओं को ही नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को बुराइयों और विकारों से स्वयं की रक्षा करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आंतरिक पवित्रता और सकारात्मक विचारों की शक्ति को बढ़ाकर व्यक्ति अपने जीवन के साथ समाज को भी बेहतर दिशा दे सकता है।
कार्यक्रम में उपअधीक्षक मनोज मिश्रा, सहायक जेल अधीक्षक गीता राठौड़, सहायक जेल अधीक्षक सौरभ सिंह और जेल शिक्षिका गीता रायकवार सहित ब्रह्माकुमारी संस्थान की बीके पार्वती बहन, बीके कामिनी बहन तथा बीके सुनील भाई मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान बंदियों को आत्मचिंतन, सकारात्मक सोच और बेहतर जीवन के लिए प्रेरित किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे

