फार्मासिस्टों के भविष्य पर संकट: दवा व्यापार में फार्मासिस्ट की अनिवार्यता खत्म करने का विरोध
सागर, 17 अप्रैल (हि.स.)। दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षित वितरण को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच एमपी फार्मासिस्ट एसोसिएशन जिला सागर ने शुक्रवार को केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है। संगठन ने ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) द्वारा हाल ही में दिए गए उस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है, जिसमें होलसेल दवा व्यापार के लिए ‘सक्षम व्यक्ति’ की योग्यता में बदलाव तथा फार्मासिस्ट की अनिवार्यता कम करने की सिफारिश की गई है।
सागर संभाग प्रभारी अमित तिवारी के नेतृत्व में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा को भेजे गए ज्ञापन में संगठन ने कहा कि औषधि एवं प्रसाधन नियम 1945 के नियम 64 में प्रस्तावित संशोधन पंजीकृत फार्मासिस्टों के वैधानिक अधिकारों का हनन है।
अमित तिवारी ने कहा कि यह प्रस्ताव केवल पेशेवर अधिकारों का मामला नहीं, बल्कि आमजन के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि दवा व्यापार को सामान्य वस्तुओं की तरह बिना विशेषज्ञ निगरानी के संचालित किया गया, तो इसके दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं।
ज्ञापन में प्रमुख मांगें
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होलसेल दवा व्यापार लाइसेंस के लिए प्रशिक्षित और पंजीकृत फार्मासिस्ट की उपस्थिति अनिवार्य बनी रहे।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) तथा गुड फार्मेसी प्रैक्टिस (GPP) के वैश्विक मानकों के अनुसार दवाओं का भंडारण और वितरण विशेषज्ञों की देखरेख में ही होना चाहिए।
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फार्मासिस्टों की कमी के तर्क को संगठन ने खारिज करते हुए कहा कि देश में बड़ी संख्या में योग्य फार्मासिस्ट बेरोजगार हैं।
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आधुनिक दवाओं के प्रभाव, रखरखाव और सुरक्षित वितरण के लिए वैज्ञानिक समझ आवश्यक है, जो प्रशिक्षित फार्मासिस्ट के पास होती है।
ज्ञापन सौंपने और विरोध प्रदर्शन के दौरान संगठन के वरिष्ठ सदस्य एवं पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें राजेश प्यासी, वीरेंद्र उदेनिया, उमेश तिवारी, करण ठाकुर, राममिलन ढिमोले, बंटू ठाकुर, गोटीराम पटैल, हिर्देश हजारी और ब्रजेश प्रजापति शामिल रहे।
एमपी फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि DTAB की सिफारिशों को वापस नहीं लिया गया तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा। संगठन का कहना है कि दवाओं को केवल वस्तु मानना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर भूल साबित हो सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे

