पन्ना: स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: छतरपुर को 36 डॉक्टर, पन्ना को मिले सिर्फ 6; खाली पदों से मरीज परेशान

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पन्ना: स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: छतरपुर को 36 डॉक्टर, पन्ना को मिले सिर्फ 6; खाली पदों से मरीज परेशान


पन्ना, 01 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में की गई डॉक्टरों की नई पदस्थापनाओं के बाद पन्ना जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जिले को उम्मीद थी कि डॉक्टरों की कमी दूर होगी, लेकिन नई नियुक्तियों में पन्ना को अपेक्षाकृत कम डॉक्टर मिलने से नाराजगी सामने आ रही है। पड़ोसी जिले छतरपुर में जहां 36 नए डॉक्टर पदस्थ किए गए हैं, वहीं पन्ना को मात्र 6 डॉक्टर मिले हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है। जिले के जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक विशेषज्ञ डॉक्टरों और चिकित्सा अधिकारियों के कई पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों के आधे से ज्यादा पद खाली

जिला चिकित्सालय पन्ना में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 38 स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 16 विशेषज्ञ डॉक्टर ही कार्यरत हैं, जबकि 22 पद रिक्त हैं। इसी तरह चिकित्सा अधिकारियों के 21 स्वीकृत पदों में से केवल 6 पद भरे हैं और 15 पद खाली पड़े हैं।

सीमित डॉक्टरों के भरोसे प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज किया जा रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने से कई मरीजों को दूसरे जिलों के अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।

सीएचसी और पीएचसी में भी डॉक्टरों की कमी

जिले के पवई, अमानगंज, शाहनगर, अजयगढ़, गुनौर और देवेंद्रनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी हालात चिंताजनक हैं। इन स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 22 स्वीकृत पद हैं, लेकिन केवल एक विशेषज्ञ चिकित्सक ही सेवाएं दे रहे हैं।

वहीं चिकित्सा अधिकारियों के 49 स्वीकृत पदों में से केवल 17 पदों पर डॉक्टर तैनात हैं और 32 पद रिक्त हैं। डॉक्टरों की कमी के कारण ग्रामीण मरीजों को सामान्य इलाज के लिए भी जिला अस्पताल या जबलपुर, रीवा, कटनी जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है।

गरीब मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित

डॉक्टरों की कमी का सबसे ज्यादा असर गरीब, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और दूरदराज गांवों से आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है। विशेषज्ञ उपचार नहीं मिलने से कई बार मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है, जहां इलाज महंगा होने से आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि पन्ना जैसे पिछड़े जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है। डॉक्टरों की पर्याप्त पदस्थापना नहीं होने से सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। लोगों ने मांग की है कि जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों और चिकित्सा अधिकारियों के रिक्त पदों को जल्द भरा जाए, ताकि मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश पांडे

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